सुभद्रा-बलभद्र के साथ मौसी के घर पहुंचे भगवान जगन्नाथ
सीआरपीएफ डीआइजी अनिल कुमार ने झाड़ू लगाकर किया यात्रा का आगाज
सिलीगुड़ी : शहर में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की निकली रथयात्रा में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. भव्य और आकर्षक तरीके से सजाये गये रथ पर सवार होकर परंपरागत तरीके से भगवान ज्गन्नाथ बहन सुभद्रा व भाई बलभद्र के साथ अपनी मौसी के घर तरीके से पहुंच गये. वर्षों से चली आ रही इसी परंपरा के तहत गुरुवार को सिलीगुड़ी में भी विभिन्न मंदिरों की ओर से भव्य व विशाल रथयात्रा निकाली गयी. मौसी के घर आठ दिन आराम करके व घूमने-फिरने का आनंद उठाने के बाद वापस 12 जुलाई को वापस रथयात्रा के जरिये लौटेंगे.
रथयात्रा को लेकर इस्कॉन मंदिर प्रबंधन की ओर से विराट व भव्य तैयारी की गयी थी. इस बार पहली बार शहरवासियों को पूरी की तर्ज पर निकली रथयात्रा में शामिल होने का मौका मिला. भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण) के अलावा बहन सुभद्रा व भाई बलदेव का अलग-अलग तीन रथों को भव्य रूप दिया गया था. तीनों रथ पूरी तरह अत्याधुनिक हाइड्रोलिक सिस्टम से युक्त था. साथ ही तीनों रथों को पुरी में निकलनेवाले रथ का ही स्वरूप दिया गया. बतौर अतिथि सीआरपीएफ के डीआइजी अनिल कुमार ने रथ के सामने झाड़ू लगा व रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ किया.
रथयात्रा को लेकर सुबह से मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं की काफी गहमा-गहमी रही. खासकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखा गया. रथयात्रा को लेकर धार्मिक कार्यक्रम मंदिर परिसर में दिन के 12.30 बजे शुरू हुआ. वहीं मंदिर प्रांगण से एक बजे पारंपरिक तरीके से निकाली गयी. रथयात्रा निकलते ही मंदिर में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा. रथ को खींचने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ मच गयी. इसमें इस्कॉन से दीक्षा प्राप्त कर चुके कई विदेशी महिला-पुरुष भी भारतीय वेशभूषा में सुसज्जित होकर शामिल हुए. रथयात्रा के दौरान सड़क के दोनों ओर खड़े लोगों ने भगवान जगन्नाथ को नमन कर श्रद्धा के साथ स्वागत किया. वहीं बैंड-बाजे की धुन पर जहां श्रद्धालु थिरकते नजर आये, वहीं जयकारे व हरि कीर्तन का दौर चलता रहा.
शहर के मुख्य सड़कों का परिभ्रमण कर रथयात्रा वापस मंदिर परिसर में पहुंचा. यहां भगवान जगन्नाथ व उनके भाई-बहन को एक अन्य वाहन पर सवार कर माटीगाड़ा के शिव मंदिर ले जाया गया. इस्कॉन मंदिर प्रबंधन कमेटी के प्रवक्ता सह महाराज नामकृष्ण दास ने बताया कि इस बार भगवान की मौसी का घर अस्थायी रूप से शिव मंदिर में बनाया गया है. वहां सात दिनों तक आराम करने रथ के जरिये उन्हें 12 जुलाई को इस्कॉन मंदिर में लाया जायेगा.
