पद से हटाये गये भाजपा के मालदा जिलाध्यक्ष

मालदा : राज्य में बेहद कम समय में प्रमुख विपक्षी दल के रुप में अपनी पहचान बनाने वाली भाजपा के राज्य नेतृत्व पर रंगदारी वसूली और पक्षपात का आरोप लगा है. मजे की बात है कि यह आरोप किसी सामान्य कार्यकर्ता ने नहीं बल्कि मालदा के पूर्व जिलाध्यक्ष ने लगाया है जिन्हें हाल ही में […]

मालदा : राज्य में बेहद कम समय में प्रमुख विपक्षी दल के रुप में अपनी पहचान बनाने वाली भाजपा के राज्य नेतृत्व पर रंगदारी वसूली और पक्षपात का आरोप लगा है. मजे की बात है कि यह आरोप किसी सामान्य कार्यकर्ता ने नहीं बल्कि मालदा के पूर्व जिलाध्यक्ष ने लगाया है जिन्हें हाल ही में पद से हटा दिया गया है.

उनकी जगह पूर्व उपाध्यक्ष गोविंद मंडल को राज्य नेतृत्व ने जिलाध्यक्ष का दायित्व सौंपा है. सोमवार को प्रेस वार्ता के जरिये पूर्व जिलाध्यक्ष संजीत मिश्र ने राज्य नेतृत्व पर बरसते हुए बताया कि केवल 11 माह तक पद पर रहने के बाद उन्हें पद से कुछ विशेष कारणों से हटाया गया है.

वह अपने प्रति किये गये अन्याय को चुपचाप सहने वाले नहीं हैं. सबसे पहले वह दिल्ली दरबार में इसकी शिकायत करने के बाद अगर असर नहीं हुआ तो धरने पर भी बैठेंगे. यहां तक कि वह अपनी आत्मसम्मान की लड़ाई को अदालत तक ले जाने के लिये कटिबद्ध दिखे. उन्होंने कहा कि उन्हें पद से हटाने के लिये जो आरोप लगाये गये हैं उससे वह अपमानित महसूस कर रहे हैं. इसके खिलाफ वह राज्य नेतृत्व के खिलाफ जेहाद शुरु कर रहे हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि दल के सत्ता की तरफ बढ़ते हुए देखकर उसमें गुटबाजी तेज हो गयी है. इसी का वह शिकार हुए हैं. आज की प्रेस वार्ता में संजीत मिश्र के साथ जिला स्तर के कई अन्य नेता भी थे.
संजीत मिश्र ने बताया कि उन्हें 23 जुलाई 2018 को जिलाध्यक्ष मनोनीत किया गया. इसके लिये उन्होंने 50 हजार रुपये मासिक वाली सरकारी नौकरी छोड़कर भाजपा में योगदान दिया है. उसके पहले वह सेना में भी सेवारत थे.
संजीत मिश्र ने आरोप लगाया कि उन्हें शुरु से जिला कमेटी और ब्लॉक कमेटी गठित करने से रोका गया. इसके बावजूद उनके नेतृत्व में लोकसभा चुनाव में जिले ने बेहतर प्रदर्शन किया है. उत्तर मालदा की सीट और हबीबपुर विधानसभा उपचुनाव में सफलता मिली है. दक्षिण मालदा सीट के लिये उन्होंने प्रत्याशी पर आपत्ति की थी जिसे अनसुना कर दिया गया था. प्रत्याशी बदले जाने पर हम जीत सकते थे. उन्हें पद से हटाने के बारे में कोई पत्र नहीं दिया गया है.
मीडिया से उन्हें इसकी जानकारी मिली है. खबर है कि लंबे समय तक अपने पद पर रहते हुए भाई-भतीजाबाद करने के आरोप में आठ अध्यक्षों को बदला गया है. दरअसल, राज्य नेतृत्व के एक हिस्से को उनकी फरमाईश के अनुसार रंगदारी नहीं देने के चलते उन्हें 11 माह के बाद ही हटा दिया गया. इससे वह बेहद अपमानित महसूस कर रहे हैं. जबकि दक्षिण दिनाजपुर के जिलाध्यक्ष पिछले तीन साल से पद पर जमे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य नेतृत्व के कुछ नेताओं के इशारे पर उन्हें हटाया गया है.
जिलाध्यक्ष का दायित्व मिलने पर गोविंद मंडल ने कहा कि उन्हें भी अभी तक पत्र नहीं मिला है. सुनने में आ रहा है कि उन्हें जिलाध्यक्ष बनाया गया है. दलीय निर्देश का वह पालन करेंगे. निवर्तमान अध्यक्ष क्या बोलते हैं क्या नहीं उससे उन्हें कोई मतलब नहीं है. उस पर वह कोई मंतव्य नहीं करेंगे.

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