बिन्नागुड़ी : जलपाईगुड़ी जिले के बानरहाट थाना अंतर्गत बिन्नागुड़ी रेलवे स्टेशन एवं मोराघाट रेलगेट के बीच, बानरहाट हिंदी कॉलेज के सामने धुबड़ी से सिलीगुड़ी की ओर जा रही इंटरसिटी एक्सप्रेस से एक हाथी शावक कट गया. घटना रविवार रात 8.00 से 8.30 बजे के बीच हुई.
हाथी की मौत के बाद काफी देर तक ट्रेन वहीं रुकी रही, जिससे यात्री परेशान रहे. इस घटना से वन्यजीव-प्रेमियों में शोक की लहर है. उल्लेखनीय कि मोराघाट रेल गेट के पास ही लगभग 10 वर्ष पहले सात हाथियों की मौत ट्रेन की टक्कर से हुई थी. बीते साल भी चार हाथियों की जान इसी जगह गयी थी.
स्थानीय मोराघाट निवासी रमेश सिंह ने बताया कि रात में चार-पांच हाथियों का एक छोटा झुंड रेल लाइन पार कर रहा था, तभी धुबड़ी-सिलीगुड़ी इंटरसिटी एक्सप्रेस बानरहाट की ओर जा रही थी. बाकी हाथी पार हो गये, पर शावक पार नहीं हो पाया और ट्रेन की टक्कर से उसकी मृत्यु हो गयी.
यह काफी सुनसान इलाका है शाम होते ही गाड़ियों एवं लोगों की आवाजाही काफी कम हो जाती है.बता दें कि जब सात हाथियों की मौत हुई थी तब तत्कालीन यूपीए सरकर के पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने भी मोराघाट रेल गेट का दौरा किया था. लंबी-चौड़ी बातें हुई थीं, लेकिन हाथियों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठता नहीं दिखा.
इस संबंध में ऑनरेरी वाइल्डलाइफ वार्डन सीमा चौधरी ने कहा कि रेलवे को बार-बार आगाह किया जाता है, लेकिन उसका कोई असर देखने को नहीं मिलता. गति संबंधी नियमों की अनदेखी से इस तरह के हादसे होते हैं.
रात में धुबड़ी-सिलीगुड़ी इंटरसिटी एक्सप्रेस की चपेट में आया
बिन्नागुड़ी : जलपाईगुड़ी जिले के बानरहाट थाना अंतर्गत बिन्नागुड़ी रेलवे स्टेशन एवं मोराघाट रेलगेट के बीच, बानरहाट हिंदी कॉलेज के सामने धुबड़ी से सिलीगुड़ी की ओर जा रही इंटरसिटी एक्सप्रेस से एक हाथी शावक कट गया. घटना रविवार रात 8.00 से 8.30 बजे के बीच हुई.
हाथी की मौत के बाद काफी देर तक ट्रेन वहीं रुकी रही, जिससे यात्री परेशान रहे. इस घटना से वन्यजीव-प्रेमियों में शोक की लहर है. उल्लेखनीय कि मोराघाट रेल गेट के पास ही लगभग 10 वर्ष पहले सात हाथियों की मौत ट्रेन की टक्कर से हुई थी. बीते साल भी चार हाथियों की जान इसी जगह गयी थी.
स्थानीय मोराघाट निवासी रमेश सिंह ने बताया कि रात में चार-पांच हाथियों का एक छोटा झुंड रेल लाइन पार कर रहा था, तभी धुबड़ी-सिलीगुड़ी इंटरसिटी एक्सप्रेस बानरहाट की ओर जा रही थी. बाकी हाथी पार हो गये, पर शावक पार नहीं हो पाया और ट्रेन की टक्कर से उसकी मृत्यु हो गयी.
यह काफी सुनसान इलाका है शाम होते ही गाड़ियों एवं लोगों की आवाजाही काफी कम हो जाती है.बता दें कि जब सात हाथियों की मौत हुई थी तब तत्कालीन यूपीए सरकर के पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने भी मोराघाट रेल गेट का दौरा किया था. लंबी-चौड़ी बातें हुई थीं, लेकिन हाथियों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठता नहीं दिखा.
इस संबंध में ऑनरेरी वाइल्डलाइफ वार्डन सीमा चौधरी ने कहा कि रेलवे को बार-बार आगाह किया जाता है, लेकिन उसका कोई असर देखने को नहीं मिलता. गति संबंधी नियमों की अनदेखी से इस तरह के हादसे होते हैं.
