बीते एक माह में पांच लोगों की रहस्यमय मौत

मालदा : आदिवासी बहुल एक गांव में इन दिनों प्रेत का आतंक छाया हुआ है. बीते एक माह में इस गांव में पांच लोगों की आसपास ही मृत्यु पेट दर्द और तेज बुखार से होने की जानकारी है. यह घटना आदिवासी बहुल मालदा थानांतर्गत भावुक ग्राम पंचायत के बासुदेवपुर गांव में होने के बाद वहां […]

मालदा : आदिवासी बहुल एक गांव में इन दिनों प्रेत का आतंक छाया हुआ है. बीते एक माह में इस गांव में पांच लोगों की आसपास ही मृत्यु पेट दर्द और तेज बुखार से होने की जानकारी है. यह घटना आदिवासी बहुल मालदा थानांतर्गत भावुक ग्राम पंचायत के बासुदेवपुर गांव में होने के बाद वहां प्रेत का आतंक छाया हुआ है. घटना के बाद से गांव के अधिकतर परिवार अन्यत्र जा चुके हैं. जो बचे हैं वे भी प्रेत के आतंक से भयभीत हो घर में ही बंदी हो गये हैं.

इससे उनका दैनिक जीवन और उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है. ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद अब तक एक भी प्रशासन या ग्राम पंचायत सदस्य ने गांव का दौरा नहीं किया है. इसलिये वे और भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. जिलाधिकारी कौशिक भट्टाचार्य ने बताया क उन्हें इसकी जानकारी नहीं है.

ब्लॉक प्रशासन के जरिये वे इसकी खोज-खबर लेंगे. वहीं, स्थानीय पंचायत समिति के सदस्य ने इस दहशत को मानसिक भ्रम बताया है.हालांकि समिति के पक्ष से अभी तक ब्लॉक प्रशासन को घटना की जानकारी नहीं दिया जाना इस पूरे घटनाक्रम को रहस्यमय बना रहा है.

जानकारी अनुसार बासुदेवपुर गांव के अधिकतर मिट्टी, टाली के घरों में ताला लगा हुआ है. कुल 30 परिवारों में से अब केवल तीन परिवार गांव में रह गये हैं. बचे लोगों में मृत व्यक्ति का परिवार भी है. उल्लेखनीय है कि बीते माह जिन पांच लोगों की मृत्यु हुई है उनके नाम हैं, मारंग सोरेन (45), दिनेश मुर्मू (35), सिंगराय किस्कू (31), सुमाई किस्कू (30) और आमिन मार्डी (40). गांव के निवासी ताला हेमब्रम, राजू हांसदा, मुंशी टुडू और मातु किस्कू ने बताया कि इन सभी की पेट दर्द और तेज ज्वर से मृत्यु हो गयी. घटना इतनी जल्दी में हुई कि ग्रामीणों का कहना है कि ये मौतें भूतों के चलते हुई है. मातू किस्कू ने बताया कि उनके भाई को अचानक पेट दर्द शुरु हुआ.

उसके कई रोज बाद ही उसकी मृत्यु हो गयी. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि पेट दर्द के बाद उन्होंने कोई दवा खायी थी कि नहीं. उन्होंने कहा कि सभी लोग कह रहे हैं कि यह भूतों का तांडव है. शाम के बाद कोई घर से बाहर नहीं निकलता है. घर के भीतर बाहर से तरह तरह की आवाज सुनायी पड़ती है. काफी दिनों से घरबंदी रहने से रोजी रोटी भी बंद हो गयी है. भूत के डर से बाल-बच्चों को छोड़कर कहीं काम के लिये नहीं जा पा रहे हैं. वे भी गांव छोड़ने का विचार कर रहे हैं.
इस बारे में स्थानीय पंचायत समिति के सदस्य गौतम पाहानी ने बताया कि बासुदेवपुर गांव में भूतों का आतंक छाया हुआ है. यह एक भ्रम के सिवा कुछ नहीं है. ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है. ब्लॉक प्रशासन को भी जानकारी दी जायेगी. अब यह समझा जा सकता है कि लगातार पांच लोगों की मौत की घटना के बाद अभी तक पंचायत समिति के सदस्य ने ब्लॉक प्रशासन को भी जानकारी देना मुनासिब नहीं समझा वह इस समस्या के प्रति कितने गंभीर हैं.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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