तेन्जिंग नोर्गे की प्रतिमा पर किया माल्यार्पण
नेपाल सरकार के खिलाफ लगा लापरवाही का आरोप
सिलीगुड़ी : पर्वतारोहियों के जीवन से खिलवाड़ करने का आरोप पड़ोसी देश नेपाल सरकार पर लगा रहा है. पर्वत शिखर फतह करने गये कयी पर्वतारोहियों की मौत व लापता होने के लिए पड़ोस देश नेपाल सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. साथ ही पर्वतारोहण का वाणिज्यीकरण व पर्वतारोहण कराने वाली संस्थाओं को लाइसेंस आदि मुहैया कराने में भी लापरवाही का आरोप नेपाल सरकार के खिलाफ उठा है. नेपाल सरकार की इस लापरवाहपूर्ण हरकत पर नकेल कसने के लिए स्वेच्छासेवी संस्थाओं ने भारत सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है.
प्रति वर्ष की भांति इस बार भी हिमालयान नेचर एंड एडवेन्चर फाउंडेशन (एचएनएएफ) व सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण (एसजेडीए) के संयुक्त तत्वाधान में एवरेस्ट डे का आयोजन शहर के दार्जिलिंग मोड़ पर किया गया. वहां स्थित तेन्जिंग नोर्गे की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया. साथ ही पिछले कई वर्षों में पर्वतारोहण के दौरान मारे गये व लापता हुए पर्वतारोहियों की तस्वीरों पर भी पुष्प अर्पित किया गया. 66वें एवरेस्ट डे के अवसर पर पर्वतारोहण के दौरान मारे गये व लापता हुए पर्वतारोहियों को स्मरण करते हुए नेपाल सरकार की लापरवाही के खिलाफ आवाज बुंलद कर श्रद्धासुमन अर्पित किया गया .
वहीं एवरेस्ट फतह करने वाले पहले भारतीय शेरपा तेन्जिंग नोर्गे को भारत रत्न देने की मांग भी की गयी. कार्यक्रम में उपस्थित सिलीगुड़ी शेरपा बुद्धिष्ट वेलफेयर कमिटी के सदस्य कमल शेरपा, पासांग लामा शेरपा ने बताया कि एवरेस्ट फतह करने वाले पहले भारतीय तेन्जिंग नोर्गे को भारत रत्न देने की मांग पर कई बार केंद्र व राज्य सरकार से आवेदन किया गया. लेकिन आज तक कोई सुनवायी नही हुयी. इधर, एचएनएफ के सचिव अनिमेष बसू ने बताया कि आज के दौर में पर्वतारोहण काफी आसान हो गया है. रूपए के बदले पर्वतारोहण कराने वाली कई संस्था दुकान खोल कर बैठी है.
जो अधिक रूपए लेकर अयोग्य व्यक्तियों को भी पर्वतारोहण के लिए अनुमति दिलाते हैं. लापरवाहपूर्ण इस प्रक्रिया में नेपाल सरकार की अहम भूमिका है. नेपाल सरकार ने पर्वतारोहण को एक व्यवसाय में तब्दील कर दिया है. जिसकी वजह से संस्थाएं अप्रशिक्षित, शारीरिक व मानसिक रूप से अयोग्य पर्वतारोहियों को भी पर्वतारोहण के लिए ले जाते हैं. इन्हीं लापरवाही भरे गतिविधियों की वजह से कई पर्वतारोहियों की जान चली जाती है. वहीं पर्वतारोहण को गये कई पर्वतारोहियों का आज तक कुछ पता नहीं चला है. पर्वतारोहण कराने वाली संस्थाओं पर नेपाल सरकार का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है. इस दिशा में भारत सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया है. नेपाल सरकार की लापरवाह पूर्ण गतिविधि के खिलाफ हस्तक्षेप करने की मांग भारत सरकार से किया गया है. भारत सरकार के साथ इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन को भी इस संबंध से अवगत कराया जायेगा.
यहां बता दें कि बीते 14 मई को कंचनजंघा व एवरेस्ट पर पर्वतारोहण के लिए रास्ता खोल दिया गया. नेपाल सरकार ने पर्वतारोहण के लिए 44 दल में शामिल कुल 381 लोगों को अनुमति दी थी. वर्ष 1953 में पहली बार पर्वतारोहण शुरू हुआ था. तब से लेकर अभी तक में इस बार रिकॉर्ड सबसे अधिक पर्वतारोहियों को पर्वतारोहण की अनुमति दी गयी है. नेपाल में पर्वतारोहण कराने वाली कुल 21 संस्थाएं हैं. अभी हाल में ही कंचनजंधा फतह कर लौट रहे पश्चिम बंगाल के दो पर्वतारोही कुंतल काड़ा व विप्लव वैद्य की मौत हो गयी. इसके अतिरिक्त मकालू शिखर फतह करने गये राज्य के एक और पर्वतारोही दीपंकर घोष की मौत हो गयी. कुल मिलाकर इस बार 11 पर्वतारोहियों की मौत हुयी है.
