लोकसभा चुनाव : कहीं दिखा उत्साह तो कहीं पड़ा फीका

लोकसभा चुनाव के लिए शांतिपूर्ण तरीके संपन्न हुआ मतदान चुनाव से पहले बागान खुलने की श्रमिकों को थी उम्मीद नागराकाटा/मदारीहाट : डुआर्स के बंद पड़े चाय बागानों के श्रमिकों मतदान के प्रति कहीं उत्साह तो कहीं फीका रहा. श्रमिकों ने गुरूवार की सुबह शांतिपूर्ण तरीके से मतदान दिया. नागराकाटा ब्लॉक अंतर्गत तीन चाय बागान बंद […]

लोकसभा चुनाव के लिए शांतिपूर्ण तरीके संपन्न हुआ मतदान

चुनाव से पहले बागान खुलने की श्रमिकों को थी उम्मीद
नागराकाटा/मदारीहाट : डुआर्स के बंद पड़े चाय बागानों के श्रमिकों मतदान के प्रति कहीं उत्साह तो कहीं फीका रहा. श्रमिकों ने गुरूवार की सुबह शांतिपूर्ण तरीके से मतदान दिया. नागराकाटा ब्लॉक अंतर्गत तीन चाय बागान बंद हैं. जिनमें धरनीपुर चाय बागान 2004 से बंद है जबकि ग्रासमोड़ चाय बागान जनवरी से माह से बंद रहने के बाद मार्च के अंत में खुला होने के बावजूद श्रमिक काम पर नहीं जा रहे हैं.
चाय बागान अचल अवस्था में है. साथ ही केरन चाय बागान तीन वर्ष तक बंद रहने के बाद लोकसभा चुनाव के ठीक पहले 8 अप्रैल को खुला है. डुआर्स के चाय बागानों के श्रमिक आर्थिक समस्या से जूझ रहे हैं. जिसके कारण चाय श्रमिक कई वर्षो से न्यूतम मजदूरी की मांग करते आ रहे हैं.
27वीं लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण का मतदान राज्य के कूचबिहार और अलीपुरद्वार में संपन्न हुआ. बंद चाय बागान के श्रमिकों का कहना है कि हमें उम्मीद थी कि लोकसभा चुनाव से पहले सरकार बंद चाय बागानों को खोलने की पहल करेगी, परंतु ऐसा नहीं हुआ. फिर भी हमलोगों ने उत्साह पूर्वक अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए मतदान में भाग लिया. बंद धरनीपुर चाय बागान की एक छात्रा निकिता कुजूर ने पहली बार मतदान में हिस्सा लिया. उन्होंने कहा कि हमलोगों ने इस बार बड़ी उत्साह के साथ वोट दिया, क्योकि हमें आशा है कि चुनाव के बाद जो सरकार आएगी वे हमारी बंद चाय बागानों को खोलने में सहायक होगी. अचल अवस्था में पड़े ग्रासमोड़ चाय बागान की एक महिला चाय श्रमिक शांति भुजेल ने कहा कि हमें उम्मीद थी कि लोकसभा चुनाव के पहले चाय बागान के समस्या का समाधान हो जाएगा. परंतु ऐसा नहीं हुआ. फिर भी हम मतदान करने पहुंचे हैं. हमें आशा है कि चुनाव के बाद चाय बागान खुल जायेगा.
धरनीपुर चाय बागान की महिला चाय श्रमिक पवर्ती ग्वाला, सपना लोहार ने बताया कि पास में स्थित केरन चाय बागान खुल गया, हमें भी चुनाव से पहले चाय बागान खुलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. वर्तमान में फाइनेंसर के माध्यम से चाय बागान चलता है, जहां हमें सुखा 150 रुपया दैनिक मजदूरी मिलता है, सुनने में आ रहा है कि अप्रैल से 160 रुपया मजदूरी मिलेगा. लेकिन यह हमारे परिवार के पर्याप्त नहीं है, हमलोगों ने आज अपना मत डाला.चुनाव के बाद सरकार को हमारे बारे में सोचते हुए बागान को खोलने की पहल करे.
वहीं, मदारीहाट के बंद पड़े चाय बागानों के श्रमिक परदेश में रहकर कमाई करने को मजबूर हैं. यही वजह है कि इस बार लोकसभा चुनाव में शायद ही कोई परदेशी श्रमिक आया हो. इनका कहना है कि वोट देने से भी क्या लाभ होगा. बंद चाय बागान तो खुलेंगे नहीं. इसलिये वे लोग वर्तमान राजनीतिक दलों से निराश हैं. गुरुवार की सुबह बंद मुजनाई और बंदापानी चाय बागानों के श्रमिकों और उनके परिवारवालों को बूथ में आकर मतदान करते हुए देखा गया. मदारीहाट में आधारित एक स्वयंसेवी संगठन के कार्यकर्ता विष्णु घतानी ने बताया कि डुआर्स के रेड बैंक, सुरेंद्रनगर और धरणीपुर के अलावा बंदापानी, ढेकलापाड़ा और मुजनाई चाय बागान आज भी बंद हैं. उनके खुलवाने का प्रयास सफल नहीं हुआ. इन बागानों से करीब एक हजार श्रमिक अन्य राज्यों में काम धंधा कर रहे हैं.
बंदापानी चाय बागान के लंबा लाइन निवासी जीवन किन्डो, गोविंद बारला करीब दो साल से चाय बागान बंद रहने से अन्य राज्य में काम कर रहे हैं. ये श्रमिक अब बंद चाय बागानों के खुलने की उम्मीद छोड़ चुके हैं. इसलिये मतदान के लिये नहीं आये. आज मुजनाई चाय बागान की श्रमिक लईया मुंडा, कृष्णा छेत्री और रीना छेत्री जैसी श्रमिक अपने वोट डालने नहीं आये.

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