शिव संग मायके से ससुराल लौटीं पार्वती

हर्षोल्लास के साथ माता को दी गयी विदाई सिलीगुड़ी : मारवाड़ी समाज की महिलाओं द्वारा होली के दूसरे दिन से लगातार 16 दिनों तक मनाया जानेवाला लोकपर्व गणगौर पूजा के अंतिम दिन सोमवार को भगवान शिव (ईसर) के साथ माता पार्वती (गवरजा) मायके से ससुराल लौट आयी. इस उपलक्ष्य पर विवाहिताओं ने आज ईसर-गवरजा का […]

हर्षोल्लास के साथ माता को दी गयी विदाई

सिलीगुड़ी : मारवाड़ी समाज की महिलाओं द्वारा होली के दूसरे दिन से लगातार 16 दिनों तक मनाया जानेवाला लोकपर्व गणगौर पूजा के अंतिम दिन सोमवार को भगवान शिव (ईसर) के साथ माता पार्वती (गवरजा) मायके से ससुराल लौट आयी. इस उपलक्ष्य पर विवाहिताओं ने आज ईसर-गवरजा का विसर्जन किया और नम आंखों से विदायी दी.
सिलीगुड़ी के आठ नंबर वार्ड की पार्षद खुशबू मित्तल की पहल और वार्ड कमेटी के तत्परता से खालपाड़ा के गांधी मैदान में आयोजित गणगौर तीज महोत्सव पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. सुबह से ही सामूहिक तौर पर गणगौर पूजा के लिए राजस्थानी वेश-भूषा में सुसज्जित महिलाओं का तांता लगा रहा. वहीं, अपराह्न तीन बजे से गांधी मैदान में बनाये गये कृत्रिम घाट पर ईसर-गवरजा को अंतिम विदायी देने के लिए महिलाओं की भीड़-उमड़ पड़ी.
महोत्सव में दिखा रंगीलो राजस्थान
गणगौर तीज महोत्सव के दौरान गांधी मैदान में रंगीलो राजस्थान की झलक देखने को मिली. आठ नंबर वार्ड कमेटी के ओर से आयोजित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान कलाकार ललित पारिख एंड ग्रुप ने राजस्थानी लोक नृत्य-संगीत से ऐसा समां बांधा की पूरा माहौल राजस्थानमय हो उठा. राजस्थानी गीतों पर महिलाएं भी लटके-झटके दिखाने को मजबूर हो उठी और देर शाम तक झूमती-नाचती रही.
भाजपा प्रत्याशी की पत्नी भी थिरकीं
दार्जिलिंग लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी राजू सिंह बिष्ट की पत्नी अनीता भी गणगौर महोत्सव में बतौर अतिथि शामिल हुईं.इस मौके पर पार्षद खुशबू मित्तल व वार्ड कमेटी के कार्यकर्ता सुभाष ने उनकको विशेष तौर पर सम्मानित किया. साथ ही राजस्थानी लोकनृत्य-संगीत पर झूम रही महिलाओं संग वह भी थिरकने को मजबूर हो उठी.
वार्ड कमेटी के सचिव सीताराम डालमिया ने गणगौर महोत्सव में खासतौर पर सहयोग करने और सफल बनाने के लिए मारवाड़ी युवा मंच की महिला विंग ‘मुस्कान’, मारवाड़ी सेवा मंच की महिला विंग समेत वार्ड कमेटी के सभी युवा व महिला कार्यकर्ता एवं समस्त शहरवासियों का तहेदिल से शुक्रिया अदा किया. दूसरी ओर पहली बार शहर के महानंदा नदी में गणगौर विसर्जन का कार्यक्रम आयोजित नहीं हुआ. लेकिन कई महिलाओं को लालमोहन निरंजन मौलिक घाट के गंदे पानी में ही मजबूरन विसर्जन करते देखा गया.

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