ममता बनर्जी भी दे सकती हैं गोरखालैंड : थुलुंग

गोरखा के जातीय पहचान व राजनीतिक सुरक्षा का समाधान करेंगी दीदी दार्जिलिंग : बिमल गुरुंग और गोरामुमो की मित्रता हो सकती है, तो ममता बनर्जी भी गोर्खालैंड दे सकती हैं. यह बात गोजमुमो विनय गुट के महकमा समिति अध्यक्ष आलोककांत मणि थुलुंग ने कही है. शहर के मोटर स्टैंड स्थित गोजमुमो विनय गुट के दार्जिलिंग […]

गोरखा के जातीय पहचान व राजनीतिक सुरक्षा का समाधान करेंगी दीदी

दार्जिलिंग : बिमल गुरुंग और गोरामुमो की मित्रता हो सकती है, तो ममता बनर्जी भी गोर्खालैंड दे सकती हैं. यह बात गोजमुमो विनय गुट के महकमा समिति अध्यक्ष आलोककांत मणि थुलुंग ने कही है. शहर के मोटर स्टैंड स्थित गोजमुमो विनय गुट के दार्जिलिंग महकमा समिति कार्यालय में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुये महकमा समिति अध्यक्ष आलोक कान्त मणि थुलुंग ने कहा कि राजनीति में कोई भी बात असम्भव नहीं है.
कुछ महीने पहले दार्जिलिंग के चौरस्ता में आयोजित एक कार्यक्रम में राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गोर्खाओं के जातीय पहचान और राजनीतिक सुरक्षा का समाधान करने की बात कही थी. शुक्रवार को एक चुनावी जनसभा को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री एवं तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी उक्त बातों को दोहराया.
बिमल गुरुंग जनता के मनोभाव को जानने में माहिर हैं. लेकिन उसमें अपने और जनता का झुकाव काफी कम देने से पुलिस ने उन पर इनकाउंटर की साजिश करने का आरोप लगाया है. बिमल गुरुंग के साथ मैंने काफी सालों तक काम किया है. इसलिए मुझे उनके हरेक बातों की जानकारी है.
श्री थुलुंग ने कहा कि गोरामुमो से लेकर गोजमुमो तक का इतिहास को देखा जाये तो बिमल गुरुंग से ज्यादा गोर्खालैंड पर समर्पित भाव मेरा है. गोरामुमो के समय में बिमल गुरुंग ने सुवास घीसिंग को धोखा देकर माकपा में शामिल हुए थे. बाद में फिर 2007 में गोजमुमो का गठन किया था.

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