भाजपा में शामिल हुआ अशोक भट्टाचार्य का भतीजा, कुछ घंटों में ही छोड़ दी पार्टी

सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर एवं माकपा विधायक अशोक भट्टाचार्य के भतीजे अर्कदीप भट्टाचार्य जो रविवार को दिन में भाजपा में शामिल हुए थे रात होते-होते भाजपा से अलग हो गये. रविवार दोपहर अर्कदीप भट्टाचार्य दार्जिलिंग के भाजपा सांसद तथा केंद्रीय मंत्री एसएस आहलूवालिया की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हुए थे. उनके […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | March 11, 2019 5:33 AM
सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर एवं माकपा विधायक अशोक भट्टाचार्य के भतीजे अर्कदीप भट्टाचार्य जो रविवार को दिन में भाजपा में शामिल हुए थे रात होते-होते भाजपा से अलग हो गये. रविवार दोपहर अर्कदीप भट्टाचार्य दार्जिलिंग के भाजपा सांसद तथा केंद्रीय मंत्री एसएस आहलूवालिया की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हुए थे.
उनके भाजपा में शामिल होने से माकपा में खलबली मची हुई थी. अशोक भट्टाचार्य सिलीगुड़ी के मेयर व विधायक होने के साथ ही पश्चिम बंगाल के बड़े सीपीएम नेता के रूप में पहचाने जाते हैं.
ऐसे में उनके भतीजे अर्कदीप भट्टाचार्य को अपनी पार्टी में शामिल करके भाजपा ने बड़ी राजनीतिक चाल चली थी. रविवार को सिलीगुड़ी शहर में एक कार्यक्रम के जरिये केंद्रीय मंत्री तथा दार्जिलिंग के सांसद एसएस अहलुवालिया ने अर्कदीप को पार्टी का झंडा थमाकर भाजपा में शामिल किया. इससे पहले अर्कदीप की सीपीएम के युवा संगठन डीवाइएफआइ तथा छात्र संगठन एसएफआइ में सक्रियता रही है.
रविवार को लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले सांगठनिक तैयारियों को चाक-चौबंद करने के लिए भाजपा सिलीगुड़ी सांगठनिक जिला कमेटी की ओर से वर्धमान रोड स्थित शिल्पांचल भवन में दार्जिलिंग संसदीय क्षेत्र के सभी बूथों तथा मंडल कार्यकर्ताओं को लेकर ‘शक्ति केंद्र प्रमुख सम्मेलन’ का आयोजन किया गया.
दार्जिलिंग से भाजपा सांसद एसएस अहलुवालिया ने इस बैठक की अगुवाई की. कार्यकर्ताओं के साथ बैठक खत्म करने के बाद उन्होंने अर्कदीप को भाजपा में शामिल किया.
अर्कदीप भट्टाचार्य ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों से प्रभावित होकर ही उन्होंने भाजपा में शामिल होने का मन बनाया. उन्होंने बताया कि देश में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या बन गयी है, जिसका हल भाजपा ही निकाल सकता है.
एक सवाल के जवाब में अर्कदीप ने बताया कि लोकतांत्रिक देश होने के चलते यहां सभी को अपनी इच्छा अनुसार किसी भी क्षेत्रीय या राष्ट्रीय दल को समर्थन करने का अधिकार है. भाजपा में शामिल होकर वह खुश हैं. लेकिन कुछ घंटों बाद ही उन्होंने खुद को भाजपा से अलग कर लिया.