सिलीगुड़ी : ढाई साल बाद दो ‘दुश्मन’ फिर बने दोस्त

सिलीगुड़ी : कहते हैं राजनीति में ना कोई स्थाई दोस्त होता है और ना ही दुश्मन. कब दो राजनीतिज्ञों के बीच दोस्ती दुश्मनी में बदल जाए और दुश्मनी दोस्ती में कुछ कहा नहीं जा सकता. इस कहावत को सिलीगुड़ी में एक बार फिर से चरितार्थ होते देखा गया है. वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में […]

सिलीगुड़ी : कहते हैं राजनीति में ना कोई स्थाई दोस्त होता है और ना ही दुश्मन. कब दो राजनीतिज्ञों के बीच दोस्ती दुश्मनी में बदल जाए और दुश्मनी दोस्ती में कुछ कहा नहीं जा सकता. इस कहावत को सिलीगुड़ी में एक बार फिर से चरितार्थ होते देखा गया है. वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में जो 2 लोग एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते थे, वही आज करीब ढाई साल बाद दोस्त बन गए हैं.

हम यहां भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भुटिया तथा सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर एवं माकपा विधायक अशोक भट्टाचार्य की बात कर रहे हैं. वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में अशोक भट्टाचार्य ने बाइचुंग भुटिया को ही हराया था. उस समय बाइचुंग भुटिया तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे. तब से लेकर अबतक राजनीति के भी काफी बदलाव हो चुका है.

बाइचुंग भुटिया अब तृणमूल कांग्रेस के साथ नहीं है. इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल की राजनीति में दिलचस्पी लेनी भी छोड़ दी है.वह अब अपने गृह राज्य सिक्किम में राजनीति कर रहे हैं. उन्होंने हामरो सिक्किम नाम से अपनी एक नई पार्टी बनाई है.

अब उनका मुकाबला सिलीगुड़ी या पश्चिम बंगाल में किसी नेता या पार्टी से नहीं बल्कि सिक्किम में पवन चामलिंग के साथ है.बहरहाल वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव के बाद बृहस्पतिवार को पहली बार अशोक भट्टाचार्य और बाइचुंग भुटिया आमने-सामने थे. दोनों के बीच कोई भी चुनावी गिला शिकवा नहीं था. सिलीगुड़ी नगर निगम की ओर से बस्ती कीड़ा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है.

इसी मौके पर बाइचुंग भुटिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे. उन्होंने ही इस कीड़ा प्रतियोगिता का उद्घाटन किया. इस दौरान अशोक भट्टाचार्य ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया. दोनों यह मान रहे हैं कि वर्ष 2016 में राजनीतिक लड़ाई थी व्यक्तिगत लड़ाई कहीं नहीं थी. यही कारण है कि एक बुलावे पर बाइचुंग भुटिया खेल प्रतियोगिता का उद्घाटन करने आ गए.

यहां यह भी बता दें कि बाइचुंग भुटिया ने तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर ना केवल लोकसभा चुनाव बल्कि विधानसभा चुनाव में भी अपना किस्मत आजमाया था. लेकिन दोनों चुनाव में ही उन्हें सफलता नहीं मिली. लोकसभा चुनाव में वह दार्जिलिंग लोकसभा सीट से वर्तमान सांसद तथा केंद्रीय मंत्री एसएस आहलूवालिया से चुनाव हार गए थे. उसके बाद भी तृणमूल सुप्रीमो तथा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी किसी भी तरह बाइचुंग भुटिया को अपनी पार्टी के साथ जोड़े रखना चाहती थी.

यही वजह है कि उन्होंने लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी बाइचुंग को सिलीगुड़ी विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतार दिया. इस सीट से माकपा की टिकट पर वाममोर्चा उम्मीदवार अशोक भट्टाचार्य फिर से अपनी किस्मत आजमा रहे थे. अशोक भट्टाचार्य किसी भी कीमत पर 2016 का विधानसभा चुनाव जीतना चाहते थे. क्योंकि राज्य में तत्कालीन वाममोर्चा सरकार के समय 20 साल तक मंत्री रहने के बाद भी वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में वह तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार रुद्रनाथ भट्टाचार्य से हार गए थे.

वर्ष 2016 में ममता बनर्जी ने रुद्रनाथ भट्टाचार्य का टिकट काट दिया. क्योंकि इस दौरान एसजेडीए के चेयरमैन रहते रुद्रनाथ भट्टाचार्य कई आरोपों के घेरे में आ गए थे. उनके स्थान पर ममता बनर्जी ने बाइचुंग भुटिया को अशोक भट्टाचार्य से मुकाबले के लिए उतार दिया. उन्हे उम्मीद थी कि बाइचुंग भुटिया पुराने दिग्गज अशोक भट्टाचार्य के लिए एक बार फिर से विधानसभा के दरवाजे बंद कर देंगे.

लेकिन इसका उल्टा हुआ. फुटबॉल मैदान पर बड़े-बड़े दिग्गजों का पसीना छुड़ाने वाले बाइचुंग भुटिया की अशोक भट्टाचार्य के सामने एक नहीं चली. उन्हें विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. उसके कुछ महीनों तक बाइचुंग भुटिया ने सिलीगुड़ी में अपनी सक्रियता दिखाई लेकिन अचानक गायब हो गए. बाद में उन्होंने अपना राजनीतिक रूख अपने गृह राज्य सिक्किम कर दिया.

अब वह आने वाले सिक्किम विधानसभा चुनाव में वर्तमान मुख्यमंत्री पवन चामलिंग तथा प्रमुख विपक्षी पार्टी एसकेएम के पीएस गोले से मुकाबले की रणनीति बनाने में लगे हुए हैं. काफी दिनों बाद बाइचुंग भुटिया आज सिलीगुड़ी आए और अशोक भट्टाचार्य के साथ गले मिले. इस संबंध में श्री भुटिया का कहना है कि उनकी कभी भी अशोक भट्टाचार्य के साथ व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं रही. उनके बीच हमेशा ही मधुर संबंध रहा. अशोक भट्टाचार्य उनके बड़े भाई के समान हैं.

जैसे ही उन्होंने इस खेल प्रतियोगिता के उद्घाटन के लिए बुलाया वह तुरंत आने के लिए राजी हो गए. राजनीति अपनी जगह है और व्यक्तिगत संबंध का अपना स्थान है. वह राजनीति के चक्कर में व्यक्तिगत संबंधों को खराब नहीं करते. दूसरी और अशोक भट्टाचार्य ने भी कुछ इसी प्रकार की बातें कही. उन्होंने कहा कि बाइचुंग भुटिया से किसी प्रकार की कोई शिकायत नहीं है. चुनाव मैदान में दोनों ने चुनावी मुकाबला किया. व्यक्तिगत मुकाबले की कोई गुंजाइश नहीं थी. जैसे उनका रिश्ता चुनाव से पहले बाइचुंग भुटिया के साथ था वैसा ही रिश्ता आज भी है.

चिटफंड कांड पर सधी प्रतिक्रिया
दूसरी ओर बाइचुंग भुटिया ने चिटफंड कांड पर भी अपनी सधी हुई प्रतिक्रिया दी .उन्होंने ममता बनर्जी की इस मामले में आलोचना तो नहीं की लेकिन इसके साथ ही यह भी कहा कि सीबीआई को लेकर जो घटना हुई है यह राज्य तथा केंद्र सरकार दोनों के लिए ही दुर्भाग्यजनक है.

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