सिलीगुड़ी : अस्पताल की जगह कम्युनिटी हॉल बनाने का किया विरोध

सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी महकमा परिषद के सभाधिपति तापस सरकार ने उत्तर बंगाल विकास मंत्रालय (एनबीडीडी) द्वारा माटीगाड़ा प्रखंड की पाथरघाटा ग्राम पंचायत के पास्कलगुड़ी में उप-स्वास्थ्य केंद्र की जमीन पर कम्युनिटी हॉल का निर्माण किये जाने का विरोध जताया है. यह विरोध उन्होंने शुक्रवार को सिलीगुड़ी महकमा परिषद के प्रशासनिक भवन में अपने दफ्तर में […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | December 15, 2018 4:09 AM
सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी महकमा परिषद के सभाधिपति तापस सरकार ने उत्तर बंगाल विकास मंत्रालय (एनबीडीडी) द्वारा माटीगाड़ा प्रखंड की पाथरघाटा ग्राम पंचायत के पास्कलगुड़ी में उप-स्वास्थ्य केंद्र की जमीन पर कम्युनिटी हॉल का निर्माण किये जाने का विरोध जताया है.
यह विरोध उन्होंने शुक्रवार को सिलीगुड़ी महकमा परिषद के प्रशासनिक भवन में अपने दफ्तर में आयोजित प्रेस-वार्ता के दौरान मीडिया के सामने जताया. इसके लिए श्री सरकार ने एनबीडीडी मंत्री रवींद्रनाथ घोष को चिट्ठी भी लिखी है. संबंधित सभी दस्तावेजों की प्रतिलिपि भी उन्होंने चिट्ठी के साथ नत्थी की है.
श्री सरकार का कहना है कि गत छह दिसंबर को पास्कलगुड़ी में एनबीडीडी ने जिस जमीन पर कम्युनिटी हॉल के निर्माण के लिए शिलान्यास किया है. असल में उस जमीन पर उप-स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण किया जाना है.
इसके लिए 2009 में ही वाम सरकार ने आवंटित किया था. 27 लाख रुपये की लागत से एक एजेंसी को टेंडर भी जारी कर दिया गया था. लेकिन इसके बाद ही सरकार परिवर्तन ममता सरकार आने के बाद से ही उप-स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण पर ग्रहण लग गया.
श्री सरकार का कहना है कि पाथरघाटा ग्राम पंचायत क्षेत्र के ग्रामीणों को फिलहाल कम्युनिटी हॉल की नहीं बल्कि उप-स्वास्थ्य केंद्र की जरूरत है. कारण की इलाकेवासियों को वहां से आठ किमी दूर माटीगाड़ा अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ता है.
गंभीर रोग से पीड़ित मरीजों व प्रसूताओं के लिए इतनी दूरी तय करना काफी महंगा भी साबित हो जाता है. उस इलाके में ग्रामीणों की अच्छी-खासी तादाद के अलावा कई चाय बागान व कई छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां भी हैं. साथ ही सिलीगुड़ी के कई नामी कॉन्वेंट स्कूल भी इसी इलाके में पड़ते हैं.
श्री सरकार ने कहा कि उप-स्वास्थ्य केंद्र के जल्द निर्माण के लिए इससे पहले उन्होंने डीएम साहिबा को भी चिट्ठी लिखकर अवगत कराया था. इस बाबत उत्तर बंगाल विकास मंत्री रवींद्रनाथ घोष से भी उनके मोबाइल पर संपर्क साधने की कोशिश की गयी, लेकिन फोन नहीं उठा.