रायगंज : आदिवासी महिलाओं के साथ किया घिनौना काम, कोर्ट ने सुनायी 20 साल की सजा

रायगंज : नौ जुलाई 2017 को रायगंज नगरपालिका बस स्टैंड में दो आदिवासी महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटना से पूरा रायगंज जल उठा था. मामले की तेजी से सुनवायी करते हुये रायगंज जिला अदालत ने शुक्रवार को घटना के दोषियों को सजा सुना दी. अदालत ने नवीन शील, सिद्धार्थ नोनिया, उत्पल चाकी, पन्ना सरकार, […]

रायगंज : नौ जुलाई 2017 को रायगंज नगरपालिका बस स्टैंड में दो आदिवासी महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटना से पूरा रायगंज जल उठा था. मामले की तेजी से सुनवायी करते हुये रायगंज जिला अदालत ने शुक्रवार को घटना के दोषियों को सजा सुना दी. अदालत ने नवीन शील, सिद्धार्थ नोनिया, उत्पल चाकी, पन्ना सरकार, बप्पा पासवान, मुन्ना राय को सश्रम कैद की सजा सुनायी है.
नवीन शील और सिद्धार्थ नोनिया को अलग-अलग धाराओं में बीस साल, उत्पल चाकी को पांच साल, पन्ना सरकार को दस साल, बप्पा पासवान और मुन्ना राय को पांच-पांच साल की सजा दी गयी है.
घटना से जुड़े तीन और आरोपियों चंदन दत्त, जयंत दास और विजय दास सजा की अवधि पहले ही पूरी कर चुके हैं. इसलिये इन्हें रिहा कर दिया गया. अदालत ने दोनों पीड़िताओं को दो और छह लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया.
उल्लेखनीय है कि 2017 में भाजपा ने एक दिन जिला बंद बुलाया था. इसी दिन रायगंज नगरपालिका बस स्टैंड को सुनसान पाकर चार आदिवासी महिलाओं के साथ अश्लील आचरण और दुष्कर्म की घटना घटी. इसके बाद रायगंज थाने में मामला दर्ज हुआ. पुलिस ने इस घटना के संबंध में नवीन शील, शुभम प्रसाद और उत्पल साहा नामक तीन बदमाशों को आग्नेयास्त्र के साथ गिरफ्तार किया.
उनके खिलाफ पोक्सो के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. इस घटना की खबर फैलते ही आदिवासी समुदाय में आक्रोश व्याप्त हो गया. 14 जुलाई 2017 को विभिन्न आदिवासी संगठनों के दस हजार से ज्यादा लोग रायगंज शहर में सड़क पर उतर आये. इस दौरान बड़े पैमाने पर गाड़ियों और दुकानों में आगजनी की गयी.

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