बालुरघाट : तीन साल का एक बच्चा ब्लड कैंसर से पीड़ित है. दक्षिण दिनाजपुर जिले के पतिराम इलाका अंतर्गत झापुस गांव का निवासी है आबिर राय. उसके पिता गणेश राय पेशे से दैनिक मजदूर हैं. घोर गरीबी में रहने वाले गणेश राय के सामने उनके बच्चे के इलाज का संकट है. संपत्ति के नाम पर उनके पास आवासीय जमीन के सिवा कुछ नहीं है.
रुपये की कमी के चलते आबिर का इलाज बंद है. कलकत्ता मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने गणेश राय को अपने बेटे का इलाज नयी दिल्ली के एम्स अस्पताल में कराने की सलाह दी है, लेकिन वहां इलाज कराने के लिए काफी बड़ी रकम की जरूरत है. अपने बेटे आबिर के लिए गणेश राय व्याकुल हैं. वे चाहते हैं कि किसी तरह उनके बेटे का इलाज हो जाये और आबिर फिर से अपने बचपन को जीने लगे.
आबिर के माता-पिता की व्याकुलता को देख किसी भी सख्त दिल इंसान का कलेजा पिघल जायेगा. किसी समाजसेवी या सामाजिक संगठन की तरफ से आबिर के इलाज की मदद के लिए प्रयास चल रहा है.
