सिलीगुड़ी : बस्ती इलाके में रहने वाले लोगों को विभिन्न समस्याओं से होकर गुजरना पड़ रहा है. बस्तियों में कई भाषा भाषी तथा धर्म के लोग एक साथ निवास करते है. लेकिन इनके बीच भी धर्म और जाति के नाम पर विभेद पैदा करने की कोशिश हो रही है. इन मुद्दों के साथ ही बस्ती इलाके में रहने वाले लोगों को घर के अलावे जमीन का पट्टा देने व अन्य समाजिक सुरक्षा प्रदान करने की मांग पर आगामी 25 तारीख को पश्चिम बंगाल बस्ती उन्नयन समिति के दार्जिलिंग जिला कमेटी की ओर से एक सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है. इस उपलक्ष में शुक्रवार को सिलीगुड़ी में एक रैली निकाली गई. जिसमें हजारों की संख्या में बस्तीवासियों ने हिस्सा लिया.
रैली सिलीगुड़ी के बाघाजतीन पार्क के सामने से निकलकर शहर के विभिन्न सड़कों से होकर गुजरी. लोग हाथों में झंडा लेकर रैली में कदम से कदम मिलाते दिखे. रैली के अंत में मीडिया से बात करते हुए संगठन के अध्यक्ष दिलीप सिंह ने बताया कि केन्द्र व राज्य सरकार के नितियों का सबसे ज्यादा असर बस्ती इलाके में रहने वाले लोगों पर पड़ता है.
इसके अलावे जिन बस्तियों को सरकार द्वारा स्वीकृति नहीं मिली है, वहां एमपी , एमएलए फंड व अन्य सरकारी योजना के तहत चलने वाले विकास कार्य ठप है. उन्होंने आगे कहा कि वाम मोर्चा के शासन काल में ही 641 लोगों का पट्टा बनकर तैयार हो गया है. मगर वर्तमान राज्य सरकार पट्टा नहीं दे रही है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि डीएम तथा विभिन्न सरकारी आदेशों के चलते सिलीगुड़ी नगर निगम को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट तथा बिजली जैसी कई अन्य परिसेवा देने में समस्या हो रही है.
उन्होंने कहा कि राज्य व केंद्र सरकार इन बस्तीवासियों को विस्थापित करना चाहती है. बस्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को धर्म और जाति के नाम पर भी विभेद पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है. बस्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को जमीन का पट्टा प्रदान करने के साथ 2 रुपये किलो की दर से अनाज देने, डिजिटल राशन कार्ड प्रदान करने,स्वास्थ्य बीमा योजना के की सुविधा देने आदि की मांग में यह रैली निकाली गई.
जिसमें 154 बस्तियों से लोगों ने हिस्सा लिया था. उन्होंने बताया कि आगामी 25 तारीख को पश्चिम बंगाल बस्ती उन्नयन समिति के दार्जिलिंग जिला कमेटी की ओर से एक सम्मेलन का भी आयोजन किया जायेगा. इस दौरान अशोक भट्टाचार्य, जीवेश सरकार, नजरुल इस्लाम, रागिनी सिंह तथा तमाम वाममोर्चा नेता उपस्थित थे.
