गंगतोक : स्वामी विवेकानंद ने एक बार कहा था कि वह दिन मानवता के इतिहास का गौरवमय क्षण होगा जब विज्ञान और अध्यात्म एक दूसरे से हाथ मिलायेंगे. स्वामीजी की इस भविष्य-दृष्टि को साकार होते हुए गंगतोक में तब देखा गया जब राज्यपाल गंगा प्रसाद ने ‘पर्यवेक्षण एवं यथार्थ’ विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया.
यह सम्मेलन लाइब्रेरी ऑफ टिबेटन वर्क्स एंड आर्काइव्स धर्मशाला (एलटीडब्लूए) और नामग्याल इंस्टीच्यूट ऑफ टिबेटोलॉजी (एनआइटी) गंगतोक की संयुक्त पहल पर किया गया है. उल्लेखनीय है कि राज्यपाल नामग्याल इंस्टीचयूट ऑफ टिबेटोलॉजी के पदेन अध्यक्ष भी हैं.
गुरुवार को इस सम्मेलन का आगाज चिंतन भवन में किया गया. सम्मेलन में प्रमुख वक्ताओं में प्रो थियोडोर होडाप्प, एलटीडब्लूए के निदेशक गेशे थबखे, अनिल अनंतस्वामी, महामान्य खेनपो चोआंग, डॉ अरीया चंतास्री, प्रो इयान डरहाम और प्रो होवार्ड वाइसमैन की मुख्य रूप से भागीदारी हुई. सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय ख्याति के वैज्ञानिक और विज्ञान में प्रशिक्षित 30 बौद्ध विद्वान हिस्सा ले रहे हैं.
गौरतलब है कि सभी 30 बौद्ध विद्वानों ने अपने पहले किस्म के चार सप्ताहव्यापी परिचयात्मक कार्यशाला में प्रशिक्षण प्राप्त किया है. यह कार्यशाल बीते 03 सितंबर से लेकर 28 सितंबर के बीच संपन्न हुई. सम्मेलन में बौद्ध परंपरा के कई संप्रदायों के भिक्षु शामिल हो रहे हैं.
इसके पूर्व गेशे ल्हाकदोर निदेशक एलटीडब्लूए ने अपने सार-वक्तव्य में कॉस्मोलॉजी (ब्रह्मांड-विज्ञान) और चैतन्य का परिचय देते हुए कहा कि इस सम्मेलन के जरिये आध्यात्मिक मूल्यों और वैज्ञानिक शोध के बीच समन्वय स्थापित किया जा सकता है. इससे विज्ञान और बौद्ध दर्शन के क्षेत्र में नये अध्ययन का सूत्रपात होगा. उद्घाटन सत्र के समापन पर एनआइटी के टाशी देन्शापा ने धन्यवाद ज्ञापित किया.
