सिलीगुड़ी : पर्यावरण को साफ सुथरा तथा प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए वन विभाग ने एक नयी पहल शुरु की है. जिसके अंतर्गत सिटी फार्मिंग तकनीक के जरिये शहरवासी घरेलु कचरे को काम पर लगा सकते है. कचरे को ड्राम में रखकर फल, फुल तथा सब्जियों को उगाया जा सकता है. शुक्रवार को इन्ही विषयों को लेकर सिलीगुड़ी सोशल फरेस्ट्री डिवीजन के डाबग्राम सेंट्रल नर्सरी में एक कार्याशाला का आयोजन किया गया था. जिसमें नगर निगम के साथ ही विभिन्न स्कूलों से प्रतिनिधियों ने भाग लिया.
शहर की रोजाना सफाई सिलीगुड़ी नगर निगम के लिए एक है. सिलीगुड़ी की दिन ब दिन बढ़ती जनसंख्या से यह समस्या और ज्यादा बढ़ा रही है. इसी समस्या से लोगों को उबारने के लिए वन विभाग ने सिटी फार्मिंग शुरु की है. एक ड्रम में वर्मी थ्री जी नामक जैविक खाद तथा घरेलु कचरों की सहायता से खेती की जा सकती है.
इस संबंध में सिलीगुड़ी सोशल फरेस्ट्रर डिवीजन की डीएफओ डीएस शेर्पा ने बताया कि शहरवासी घरेलु कचरे को इधर उधर फेंक देते हैं. जिससे पर्यावरण तो गंदा होता है ही है साथ ही गंदगी से कई घातक बीमारियां भी जन्म लेती हैं. लोगों के इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सिटी फार्मिंग तकनीक शुरू की गयी है. जिससे शहरवासी घरेलु कचरों को काम पर लगाकर फल, फुल तथा सब्जियां उगा सकते है. उन्होंने बताया कि इसके लिए एक ड्रम की आवश्यकता पड़ती है.
जहां रसोई से निकलने वाले रोज के कचरों को इकट्टा कर गन्ने के छिलके, सुखी पत्ती, मिट्टी,वर्मी थ्री जी नामक जैविक खाद के सहयोग से खेती की जा सकती है. जिससे कचरों को रोज फेंकने का झंझट भी समाप्त हो जायेगा तथा पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा. उन्होंने बताया कि इस खेती में वर्मी थ्री जी की अहम भूमिका है. ये जैविक खाद ही इस खेती के पूरी प्रक्रिया को संपन्न करता है. आज इन्ही विषयों को लेकर सेंट्रल नर्सरी में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया था.
जिसमें सिलीगुड़ी के कई विद्यालयों के साथ ही नगर निगम के प्रतिनिधि व अन्य उपस्थित थे. उन्होंने ज्यादा से ज्यादा लोगों को आगे आकर इस तकनीक का इस्तमाल करने की अपील की. उस कार्यक्रम में सिलीगुड़ी नगर निगम के 23 नंबर वार्ड पार्षद कृष्ण चंद्र पाल व अन्य उपस्थित थे.
