सिलीगुड़ी : वेतन वृद्धि की मांग को लेकर उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के अस्थायी कर्मचारियों ने जमकर हंगामा किया. अस्थायी कर्मचारियों के आंदोलन की वजह से मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा परिसेवा करीब दो घंटे तक बाधित रही.
जबकि दूसरे ओर गुस्साये रोगी व उनके परिजनो ने भी ओपीडी टिकट काउंटर पर जमकर तोड़फोड़ की. जानकारी मिलते ही मेडिकल चौकी की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया.
हांलाकि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से कोई शिकायत पुलिस में नहीं दर्ज करायी गयी. करीब दो घंटे आवश्यक परिसेवा बाधित होने के बावजूद भी आंदोलनकारियों व तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की निष्क्रिय भूमिका पर प्रश्नचिन्ह लग गया है.
क्या कहना है यूनियन नेता का
कर्मचारियों के आंदोलन की वजह से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है. उधर कॉनट्रेकच्युअल वर्क्स यूनियन के अध्यक्ष लिलंदर मल्लिक ने बताया कि उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज में ठेकेदारी संस्था के मार्फत 150 से अधिक श्रमिक कार्यरत है. पिछले कई वर्षों से इन श्रमिकों के वेतन में कोई इजाफा नहीं है.
महंगाई के इस युग में भी मात्र 7 हजार रूपए प्रतिमाह मजदूरी दी जा रही है. श्रमिकों ने न्यूनतम वेतन 10 हजार रूपए प्रतिमाह देने की मांग की है. वेतन वृद्धि की मांग को लेकर ही आज आंदोलन किया गया था. उन्होंने धमकी भरे स्वर में कहा कि यदि श्रमिकों के वेतन में बढ़ोत्तरी नहीं की गयी तो आगामी दिनों में जोरदार आंदोलन किया जायेगा.
कैसे शुरू हुआ हंगामा
इनके आंदोलन की वजह से ओपीडी का टिकट काउंटर, अल्ट्रा सोनोग्राफी व अन्य आवश्यक परिसेवा बाधित हुयी. तपती धूप में मरीज व उनके परिजन कतार में खड़े-खड़े परेशान हुए. फिर प्रबंधन की निष्क्रिय भूमिका पर सवाल खड़ा कर मरीज व उनके परिजनों ने हंगामा शुरू किया. चिकित्सा के लिए कतार में खड़े निवारण सरकार, छवि दे राय, लतिका चौधरी सहित अन्य रोगी व उनके परिजनो ने बताया कि सुबह से कतार में खड़े हैं.
लेकिन टिकट काउंटर खुला ही नहीं. इतनी तपती धूप में इतने मरीज व परिजन खड़े हैं. बैठने तक की व्यवस्था नहीं है. उपर से कर्मचारियों के आंदोलन व आवश्यक चिकित्सा परिसेवा बाधित होने के बाद भी मेडिकल प्रबंधन के कान पर जू तक नहीं रेंगी.
अस्पताल अधीक्षक ने मांग को कहा जायज
श्रमिकों की मांग को उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल अधीक्षक कौशिक समाजदार ने भी सही ठहराया है. उन्होंने कहा कि श्रमिकों की मांग जायज है, लेकिन मेडिकल कॉलेज व अस्पताल की परिसेवा अत्यावश्यक परिसेवा है. इसे किसी भी तरह से बाधित नहीं किया जाना चाहिए. श्रमिकों की मांग को लेकर ठेकेदार संस्था के साथ विचार-विमर्श किया जायेगा.
डीसीपी तरूण हलदार ने बताया कि तोड़फोड़ की घटना के खिलाफ मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से कोई शिकायत नहीं की गयी है. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तीन लोगों को हिफाजत में लिया गया, बाद में छोड़ दिया गया.
आठ में से मात्र दो काउंटर खुले
मिली जानकारी के अनुसार उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में ओपीडी के 8 टिकट काउंटर हैं. रोजाना की तरह सोमवार को भी चिकित्सा के लिए आये मरीज व मरीजों के परिजन टिकट काउंटर के सामने कतार में खड़े थे. लेकिन 8 में से 6 टिकट काउंटर सोमवार को निर्धारित समय पर नहीं खुला. सिर्फ दो काउंटर खोले जाने की वजह से तपती धूप में खड़े रोगी व उनके परिजनों का पारा चढ़ गया. भीड़ ने टिकट काउंटर पर तोड़फोड़ शुरू कर दी. जमकर हंगामा मचाया.
अतिरिक्त पुलिस बल को आना पड़ा
बवाल के बाद मेडिकल चौकी की पुलिस मौके पर पहुंची. स्थिति को काबू में करने के लिए माटीगाड़ा थाने ने अतिरिक्त पुलिस बल मंगाया गया. सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस कमिश्नरेट के डीसीपी तरूण हलदार भी मौके पर पहुंचे. तोड़फोड़ करने वालों में से तीन को पुलिस ने अपनी हिफाजत में लिया. पुलिस ने बंद पड़े 6 काउंटर को खुलवा कर स्थिति को नियंत्रित किया. साथ ही चिकित्सा परिसेवा भी सुचारू कराया.
प्रतिमाह सात हजार रुपये वेतन
वेतन वृद्धि की मांग को लेकर मेडिकल कॉलेज के ठका कर्मचारियों ने काम रोककर धरना प्रदर्शन शुरू किया था. मेडिकल कॉलेज में ऐसे करीब 150 अस्थायी कर्मचारी है. इन कर्मचारियों को करीब सात हजार रूपए का वेतन मिलता है. न्यूनतम दस हजार रूपए प्रति माह वेतन की मांग को लेकर अस्थायी ठेकेदारी मानदेय कर्मचारी सोमवार को धरणा आंदोलन पर थे.
