जलपाईगुड़ी : राज्य वन विभाग ने विभाग के रंग बदलने का फैसला लिया है. पहले के लाल और हरे रंग की जगह अब नीला और हरा रंग अपनाने के लिये विभागीय निर्देश जारी किये गये हैं.
उल्लेखनीय है कि यह निर्देश विभागीय अधिसूचना की जगह राज्य के मुख्य वनपाल नरेंद्र पांडेय ने व्हाट्सऐप के जरिये जारी कर इसे 15 रोज के भीतर अमली जामा पहनाने के लिये कहा गया है. सबसे मजे की बात है कि इस नये निर्देश के बारे में खुद वन मंत्री विनयकृष्ण बर्मन को ही कोई जानकारी नहीं है.
वन विभाग के सूत्र के अनुसार, पुराना लाल रंग लाल मिट्टी और विभागीय अधिकारियों के गिरफ्तारी के अधिकार का प्रतीक था, जबकि हरे रंग का अर्थ वन संपदा है. अब विभाग लाल की जगह नीले रंग का इस्तेमाल करने जा रहा है. कई अधिकारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि यह कदम न्यूनतम कानूनी प्रक्रिया का अनुपालन किये बिना ही उठाया गया है. गौरतलब है कि पूरे राज्य में वन विभाग के 1500 से अधिक कार्यालय हैं.
इनके फ्लेक्स और होर्डिंग के रंग बदलने में करोड़ों रुपये की लागत आयेगी. इन अधिकारियों का कहना है कि एक तरफ जहां किसी योजना पर वन विभाग दस लाख रुपये से अधिक खर्च नहीं कर सकता है, वहीं करोड़ों रुपये का खर्च कैसे होगा, यह उनकी समझ में नहीं आ रहा है. इस बारे में राज्य के मुख्य वनपाल नरेंद्र कुमार पांडेय ने कोई मंतव्य नहीं किया.
