सात नंबर वार्ड निवासी पूर्व रेलवे कर्मचारी ने मकान की चाबी प्रशासन को सौंपी
पुलिस के अनुसार मामला रिश्तेदार के साथ विवाद का है, जांच में जुटी है पुलिस
जलपाईगुड़ी : आजकल गांवों के साथ-साथ शहरी इलाकों में भी समाज विरोधी तत्वों की मनमानी बढ़ने की खबरें आ रही हैं. इस समस्या की गंभीरता तब देखने को मिली जब रेलवे के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी अपना मकान प्रशासन को सुपुर्द करने को बाध्य हो गये. यह घटना जलपाईगुड़ी शहर के सात नंबर वार्ड अंतर्गत अजीत कुमार चक्रवर्ती सरणी में घटी है.
मकान मालिक शंभु चक्रवर्ती ने शनिवार को पुलिस की सुरक्षा में अपने सामान समेट कर मकान को खाली कर दिया. यही नहीं, उन्होंने कोई उपाय नहीं देखकर प्रशासन को ही अपनी संपत्ति की चाबी सौंप दी है ताकि प्रशासन उनकी संपत्ति का उचित मूल्य निर्धारित कर उसे बेचने में उनकी मदद करे. शंभु चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि कोतवाली थाना से लेकर एसपी और जिलाधिकारी तक ने उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की, इसलिए बाध्य होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा.
जानकारी के अनुसार, शंभु चक्रवर्ती ने रेलवे से अवकाश लेने के बाद वर्ष 2006 में उक्त मकान को खरीदा था. वह अपना बाकी जीवन इसी मकान में सुकून के साथ गुजारना चाहते थे. उन्होंने मकान को अपने हिसाब से सजाना संवारना भी शुरू किया था. इसी बीच वे अपने मूल निवास स्थान को चले गये थे. वापस आने पर देखा कि उनके मकान में तोड़-फोड़ की गयी है. दरवाजे और ग्रिल चुरा लिये गये हैं. उन्होंने बताया कि इस तरह की घटनाएं वर्ष 2014 से ही लगातार घट रही हैं.
इस बारे में उन्होंने कोतवाली थाना से लेकर एसपी और जिलाधिकारी तक से शिकायत दर्ज करायी. उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने राज्य गृह विभाग के सचिव को भी इस बारे में अवगत कराया. इसलिये बाध्य होकर वह मकान छोड़कर जा रहे हैं. उन्होंने मकान में ताला लगाकर उसकी चाबी प्रशासन के हाथ सौंप दी है ताकि वह उन्हें इस मकान की वाजिब कीमत दिलवा सके.
शंभु चक्रवर्ती की पत्नी स्निग्धा चक्रवर्ती ने बेहद दुखी होकर कहा कि वह बंगाली होकर बंगाल में सुरक्षित नहीं हैं. मकान बनाकर अब उसे छोड़कर जाना पड़ रहा है.
जलपाईगुड़ी कोतवाली थाना के आईसी विश्वाश्रय सरकार ने बताया कि शिकायतकर्ता का अपने किसी रिश्तेदार से विवाद चल रहा है. उन्होंने दंपती को बहुत समझाकर मकान नहीं छोड़ने का अनुरोध किया. फिलहाल मामले की जांच चल रही है इसलिए कोई मंतव्य करना उचित नहीं होगा.
