दो दिनों में 20 करोड़ से अधिक का नुकसान, चाय उद्योग की टूटी कमर

सिलीगुड़ी/नागराकाटा : पहले से ही खस्ताहाल चाय उद्योग की हालत और खराब हो गई है. न्यूनतम मजदूरी तय करने की मांग को लेकर चाय श्रमिक पिछले 2 दिनों से हड़ताल पर हैं. चाय श्रमिकों ने 3 दिनों के बंद का आह्वान किया है. पहले 2 दिन में ही चाय उद्योग को करीब 40 करोड़ रुपए […]

सिलीगुड़ी/नागराकाटा : पहले से ही खस्ताहाल चाय उद्योग की हालत और खराब हो गई है. न्यूनतम मजदूरी तय करने की मांग को लेकर चाय श्रमिक पिछले 2 दिनों से हड़ताल पर हैं. चाय श्रमिकों ने 3 दिनों के बंद का आह्वान किया है. पहले 2 दिन में ही चाय उद्योग को करीब 40 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है.
तराई तथा डुवार्स को मिलाकर दो दर्जन से भी अधिक चाय बागान बंद हैं.चाय श्रमिक ट्रेड यूनियन नेताओं के रुख से साफ है कि कल तीसरे दिन भी बंद में कोई ढील नहीं दी जाएगी. अगर तीसरे दिन भी बंद जारी रहा तो चाय उद्योग को करीब 60 से 70 करोड़ रूपये के नुकसान का अनुमान है. इससे चाय बागान मालिकों के होश उड़े हुए हैं. चाय बागान मालिकों के संगठन टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया भी श्रमिकों के इस बंद से काफी चिंतित है.
संगठन के अधिकारियों का मानना है कि 3 दिनों के बंद से चाय के उत्पादन में भी भारी कमी आएगी. मिली जानकारी के अनुसार इस महीने अगस्त 50 मिलियन किलोग्राम चाय उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था. पिछले साल अगस्त महीने में 49.63 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन हुआ था. बंद के कारण इसमें पलीता लग गया है. सूत्रों ने बताया है कि इन 3 दिनों में चाय उत्पादन पर काफी असर पड़ेगा. पहले से ही चाय उद्योग की हालत खस्ता है.
अगस्त महीने में भले ही 50 मिलियन किलोग्राम चाय उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन इतना उत्पादन होने की संभावना नहीं के बराबर है.क्योंकि इस महीने के शुरू से ही उत्पादन कम है. इसी कारण से इस महीने 28 से 30 मिलियन किलोग्राम चाय उत्पादन की संभावना जताई जा रही थी. इसमें भी 3 दिनों के बाद से करीब 3.23 मिलियन किलोग्राम कम चाय उत्पादन की संभावना है. डाई के महासचिव प्रवीर भट्टाचार्य बताया है कि न्यूनतम मजदूरी तय करने को लेकर बातचीत जारी है.
सभी पक्षों के साथ विचार विमर्श चल रहा है. सिर्फ पैसे निर्धारित करने को लेकर बात नहीं बन रही है. समस्या का शीघ्र समाधान हो जाएगा. उसके बाद भी ट्रेड यूनियनों ने हड़ताल का आह्वान कर दिया. इससे नुकसान के अलावा किसी को कोई लाभ होने वाला नहीं है. चाय बागान बंद होने से कच्चा पत्ता तोड़ने का काम पूरी तरह से बंद है. इसी वजह से चाय उत्पादन में भारी कमी आने की संभावना है. इसकी जानकारी राज्य सरकार को भी दे दी गई है.
दूसरी तरफ ट्रेड यूनियनों के संयुक्त फोरम के नेताओं ने मालिकों के इस बात को मानने से इनकार कर दिया है. यूनाइटेड फोरम के कन्वेनर जियाउल आलम ने बताया है कि श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी बार-बार बैठक के बाद भी तय नहीं की जा रही है. चाय श्रमिकों को पहले से ही काफी नुकसान हो रहा है. बंद होने से चाय उद्योग को नुकसान होगा तो बागान मालिकों पर भी असर होगा. बागान मालिक भी न्यूनतम मजदूरी तय करने की दिशा में पहल करेंगे.

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