दार्जिलिंग : राशन वितरण में गड़बड़ी का श्रमिकों ने किया विरोध

चाय बागानों में न्यूनतम मजदूरी की मांग भी की गयी बुलंद दार्जिलिंग : सरकार आदेश को उल्लंघन करनेवाले सरकारी राशन दुकानदारों पर कार्रवाई करने की मांग गोरामुमो के श्रमिक संगठन हिमालयन प्लांटेशन वकर्स यूनियन ने की. शनिवार को चुंगथुंग ऋषिहाट समष्टि अंतर्गत तामसांग चाय बगान में गोरामुमो के श्रमिक संगठन एचपीडब्ल्यूयू की गेट मीटिंग हुई. […]

चाय बागानों में न्यूनतम मजदूरी की मांग भी की गयी बुलंद
दार्जिलिंग : सरकार आदेश को उल्लंघन करनेवाले सरकारी राशन दुकानदारों पर कार्रवाई करने की मांग गोरामुमो के श्रमिक संगठन हिमालयन प्लांटेशन वकर्स यूनियन ने की. शनिवार को चुंगथुंग ऋषिहाट समष्टि अंतर्गत तामसांग चाय बगान में गोरामुमो के श्रमिक संगठन एचपीडब्ल्यूयू की गेट मीटिंग हुई. इसमें संगठन के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जेबी तमांग विशेष रूप से उपस्थित थे. उनके अलावा केन्द्रीय नेतृत्व से वाइ लामा, कार्यकारी सचिव धीरज राई, तामसांग शाखा अध्यक्ष वाइएन लामा, सचिव मिंगमा तमांग, गोरामुमो भूतपूर्व सैनिक संगठन के केंद्रीय उपाध्यक्ष रीगा तमांग समेत गोरामुमो कार्यकर्ता एवं समर्थक उपस्थिति रहे.
कार्यक्रम का शुभारंभ पार्टी के संस्थापक सुभाष घीसिंग को स्मरण करने से हुआ. मीटिंग को सम्बोधित करते हुए जेबी तमांग ने आगामी 6 अगस्त को सिलीगुड़ी के उतरकन्या में सम्पन्न होने जा रही बैठक के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि इस बैठक में न्यूनतम मजदूरी की मांग जोरदार ढंग से उठायी जायेगी. श्री तमांग ने कहा कि सरकार श्रमिकों को एमआर शॉप के जरिये चावल और आटा देती है, लेकिन ये दुकानें सप्ताह के केवल दो दिन शनिवार और रविवार को राशन बांटती हैं.
जबकि, सम्बंधित विभाग ने सप्ताह के पांच दिन एमआर शॉप खुला रखने का निर्देश दिया है. निर्देश का उल्लंघन करनेवालें दुकानदारों पर कार्रवाई की भी चेतावनी दी गयी है. वहीं चाय बगानों में श्रमिकों का राशन सप्ताह में केवल एक दिन दुकान खोलकर वितरित किया जाता है. निर्देश का पालन नहीं करनेवाले दुकानदारों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए.
श्री तमांग ने कहा कि सरकार राशन कार्ड के जरिये महीने में पांच किलो चावल और छह किलो आटा देती है, लेकिन यह पूरा नहीं मिलता है. इसके अलावा राशन की गुणवत्ता भी ठीक नहीं होती है. जमीन के पट्टा के बारे में जेबी तमांग ने कहा कि पहाड़ में पांच डेसीमल जमीन का पर्चा पट्टा के बारे में चर्चा चल रही है, लेकिन इससे हमारी समस्या का समाधान होने वाला नहीं है.
हमारे पुरखे जितनी जमीन पर रहते आ रहे हैं उस पूरी जमीन का पट्टा हम लोगों को चाहिए. श्री तमांग ने कतिपय चाय बगानों में श्रमिकों को मिलनेवाली सहूलियतों में कटौती होने का आरोप लगाते हुए बागान मालिकों को चेतावनी दी.

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