सिलीगुड़ी : उत्तर बंगाल के चाय बागान के श्रमिकों की वर्षों पुरानी न्यूनतम मजदूरी की मांग इसी जुलाई महीने में पूरी होने के आसार नजर आ रहे हैं. 30 जुलाई को राज्य के श्रम मंत्री मलय घटक सिलीगुड़ी स्थित मिनी सचिवालय उत्तरकन्या में त्रिपक्षीय बैठक करेंगे. इस बैठक में न्यूनतम मजदूरी का फैसला घोषित करने की प्रबल संभावना जतायी गयी है. 30 जुलाई की संभावित घोषणा पर भरोसा रखकर चाय श्रमिक संगठन की ज्वाइंट फोरम ने भी तीन दिवसीय इंडस्ट्रियल स्ट्राइक को स्थगित रखने का निर्णय लिया है.
उल्लेखनीय है कि न्यूनतम मजदूरी के लिए उत्तर बंगाल के चाय श्रमिक पिछले कई वर्षों से मांग करते आ रहे हैं. 30 जुलाई को उनकी मांग खत्म होने के आसार हैं. हांलाकि न्यूनतम मजदूरी की मांग पर श्रमिकों को अब तक सिर्फ तारीख ही मिली है. निर्धारित तिथि के अनुसार मंगलवार को उत्तरकन्या में राज्य के श्रम आयुक्त जावेद अख्तर ने त्रिपक्षीय बैठक की. इसके पहले अपने पिछले दौरे में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी सिलीगुड़ी में चाय बागान मालिक पक्षों के साथ बैठक की. उसके बाद बीते 13 जुलाई को कोलकाता में न्यूनतम मजदूरी कमिटी के साथ भी सरकार की बैठक हुई है.इधर न्यूनतम मजदूरी के नाम पर तारीख पर तारीख व अंतरिम से नाराज श्रमिक संगठन ज्वाइंट फोरम ने सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का मिजाज बनाया था.
आंदोलन की शुरूआत करने के लिए 23 से 25 जुलाई तक तीन दिवसीय इंडस्ट्रियल स्ट्राइक की हुंकार भरी थी. लेकिन मंगलवार की त्रिपक्षीय बैठक में राज्य के श्रम आयुक्त जावेद अख्तर ने आंदोलन को तैयार ज्वाइंट फोरम से 30 जुलाई तक टालने का आवेदन किया. उन्होंने कहा कि 30 को राज्य के श्रम मंत्री स्वयं उत्तरकन्या में न्यूनतम मजदूरी को लेकर त्रिपक्षीय बैठक करेंगे.
ज्वाइंट फोरम के जिया उल आलम ने बताया कि न्यूनतम मजदूरी की मांग पर अब तक सिर्फ तारीख ही मिली है. मजदूरों को छलावा के रूप में सरकार ने अंतरिम मुहैया कराया. चाय श्रमिकों का हक काट कर मालिक पक्ष का जेब गरम करने की नीति के खिलाफ ही तीन दिवसीय स्ट्राइक बुलायी गयी थी. आज की बैठक पूर्व निर्धारित होने के बाद भी फिर से अगली तारीख मिली है.
लेकिन 30 जुलाई को होने वाली त्रिपक्षीय बैठक में एक नयी आस दिखायी गयी है. श्रमिकों के हित को ध्यान में रखते हुए 23 से 25 जुलाई तक बुलायी गयी इंडस्ट्रियल स्ट्राइक को स्थगित रखने का निर्णय लिया गया है. लेकिन 30 जुलाई की बैठक में निर्णय नहीं होने पर सरकार के खिलाफ तीव्र विरोध के साथ मोर्चा खोला जायेगा.
