शीघ्र तय होगी चाय श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी : ममता

सिलीगुड़ी : चाय बागानों की बदहाली दूर करने को लेकर गुरुवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उत्तर बंगाल के मिनी सचिवालय उत्तरकन्या में तराई-डुआर्स और पहाड़ के बागानों के श्रमिक पक्ष के नेताओं और मालिक पक्ष के अलावा संबंधित मंत्रालयों व दफ्तरों के नेता-मंत्री, सचिव व आलाधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय मीटिंग की. कई घंटों की […]

सिलीगुड़ी : चाय बागानों की बदहाली दूर करने को लेकर गुरुवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उत्तर बंगाल के मिनी सचिवालय उत्तरकन्या में तराई-डुआर्स और पहाड़ के बागानों के श्रमिक पक्ष के नेताओं और मालिक पक्ष के अलावा संबंधित मंत्रालयों व दफ्तरों के नेता-मंत्री, सचिव व आलाधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय मीटिंग की.
कई घंटों की मैराथन मीटिंग के बाद ममता ने मीडिया के सामने चाय श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी को लेकर पिछली वाम सरकार पर जमकर बरसी. उन्होंने कहा कि केवल हड़ताल, आंदोलन करनेवाली लालफीताशाही ने केवल चाय इंडस्ट्रीज ही नहीं बल्कि पूरे बंगाल में कल-कारखानों पर ताला लटका दिया. ममता ने कहा कि आज चाय श्रमिकों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर वाम और अन्य पार्टियों के ट्रेड यूनियन नेता केवल अपनी रोटी सेंक रहे हैं. उन्होंने पिछली वाम सरकार के आंकड़ों कहा हवाला देते हुए कहा कि वाम शासन के समय चाय श्रमिकों की न्यूनतम मजूदरी मात्र 67 रुपये थी.
लेकिन मां-माटी-मानुष की मात्र सात वर्षों की (2011 के बाद) तृणमूल सरकार में यह तकरीबन अढ़ाई गुना बढ़कर 159.50 रुपये हो गयी है. अब इसे बढ़ाकर 176 रुपये करने का लक्ष्य है. ममता ने वाम और उसकी ट्रेड यूनियन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वाम समय में न्यूनतम मजदूरी में किसी वर्ष एक रुपये तो किसी वर्ष तीन रुपये तक ही बढ़ोत्तरी होती थी. ममता ने बताया मजदूरी बढ़ाने को लेकर कोलकाता में न्यूनतम मजदूरी कमेटी के साथ मीटिंग कल आयोजित होगी. यह मीटिंग त्रिपक्षीय वार्ता होगी. इस मीटिंग में सरकार कमेटी में शामिल श्रमिक यूनियन और मालिक पक्ष के साथ बातचीत करके मजूदरी निर्धारित करेगी.
कौशल विकास प्रशिक्षण
ममता ने कहा कि चाय श्रमिक परिवार में गैर-श्रमिक सदस्यों को भी स्वनिर्भर करने हेतु सरकार की ओर से उन्हें कौशल विकास प्रशिक्षण भी दिया जायेगा. वहीं चाय श्रमिकों को हर सामाजिक सुरक्षा व आर्थिक सुविधा जल्द मिले इस पर पूरा ध्यान दिया जायेगा. उनके बच्चों ही नहीं बल्कि बूढ़े मां-बाप व हरेक सदस्यों का सरकार ख्याल रखेगी. इसके लिए भी एक्सपर्ट कमेटी को सर्वे रिपोर्ट में पेश करने के अलावा संबंधित विभागों को अधिकारियों को भी खासतौर पर ख्याल रखने का निर्देश दिया गया है. ममता ने कहा कि पूरे उत्तर बंगाल में वर्ममान में 2.72 लाख चाय श्रमिक हैं.
बंद चाय बागानों को भी खोलने की कवायद
ममता ने कहा कि उत्तर बंगाल में फिलहाल पांच चाय बागान पूरी तरह से बंद पड़े हैं. अन्य कई छोटे-बड़े बागान जब चाहे खोलते हैं और जब चाहे बंद कर देते हैं. ऐसे बागानों पर भी सरकार सख्त कार्रवायी करेगी. साथ ही बंद पांचों बागानों को जल्द खोलने के लिए भी कवायद शुरु कर दी गयी है. इसके लिए भी एक्सपर्ट कमेटी को सर्वे रिपोर्ट में शामिल करने का ममता ने सलाह दी है.
एक्सपर्ट कमेटी का गठन
उत्तर बंगाल के चाय बागानों की बदहाली दूर करने और श्रमिकों व मालिक पक्ष की हर तरह की समस्या का निदान करने के लिए ममता बनर्जी ने मुख्य सचिव मलय कुमार दे के नेतृत्व में अन्य संबंधित विभागों के सचिवों को मिलाकर एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है. ममता ने इस कमेटी को तीन महीने के अंदर सर्वे रिपोर्ट पेश करने का निर्देश भी दिया है. ममता ने मीडिया से रु-ब-रु होते हुए कहा कि इस सर्वे रिपोर्ट के अनुसार ही हर समस्या का निदान जल्द किया जायेगा.
साथ ही जो वर्तमान में चाय श्रमिक हैं उन्हें ही वास्तव में पट्टा की जमीन मिले, इसके लिए एक्सपर्ट कमेटी के सर्वे के बाद नया कानून भी लागू किया जायेगा. साथ ही जिन बागानों श्रमिकों को ग्रेच्युटी व पीएफ की सुविधा नहीं मिल रही हैउस बागान मालिक व प्रबंधन के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवायी भी की जायेगी.

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