सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी में दिन प्रतिदिन जाम की समस्या गहराती जा रही है. इस समस्या से भक्त से लेकर भगवान तक सभी परेशान हैं. अब आलम यह है कि इस वर्ष भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा तथा बलराम को अपना मौसी का घर ही बदलना पड़ गया.आगामी 14 जून को पूरे भारत के साथ सिलीगुड़ी में भी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जायेगी.जिसे लेकर सिलीगुड़ी के इस्कॉन मंदिर में तैयारी जोर शोर से चल रही है.
पूरे उत्तर बंगाल में सिलीगुड़ी इस्कॉन मंदिर की रथयात्रा काफी लोकप्रिय है. इस रथयात्रा को लोगों के आकर्षण का केंद्र माना जाता है. जिसे ध्यान में रखते हुए इस्कॉन के संन्यासियों द्वारा रथ को सजाने संवारने का काम चल रहा है. विदेशी पर्यटक भी उनका हाथ बटा रहे हैं. लेकिन शहर जाम की बढ़ती समस्या को देखते हुए इस वर्ष भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा तथा बलराम के मौसी के घर के रूप में शिवमंदिर स्थित उत्तर बंगाल विश्व विद्यालय के दो नंबर गेट के निकट एक स्थान को चिन्हित किया गया है.
यहां जगन्नाथ के एक भक्त के घर को मौसी का घर बनाया गया है. जहां सात दिनों तक भगवान की पूजा अर्चना की जायेगी. इससे पहले भगवान के मौसी का घर नौकाघाट इलका था. पिछले साल तक इस्कॉन की रथयात्रा यहीं जाती थी.पत्रकारों से बातचीत के दौरान इस्कॉन सिलीगुड़ी शाखा के जन संपर्क अधिकारी नामकृष्ण दास ने बताया कि इस वर्ष 14 जून को सिलीगुड़ी के इस्कॉन में रथयात्रा उत्सव का आयोजन किया गया है.जिसे ध्यान में रखते हुए रथ को सजाया जा रहा है.
इसमें विदेशी पर्यटक भी हाथ बटा रहें हैं. उन्होंने बताया कि रथ आगामी 14 जून को दोपहर 2:30 इस्कॉन मंदिर प्रांगण से निकल कर सेवक रोड, हिलकार्ट रोड, वेनस मोड़, हाकिमपाड़ा, हैदरपाड़ा होते हुए वापस मंदिर परिसर में पहुंचेगी.मान्यता है कि रथ के दिन भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा तथा बलराम अपने मौसी के घर जाते हैं.फिर सात दिनों बाद वापस अपने घर लौटते हैं. उन्होंने बताया कि शहर में जाम की समस्या को देखते हुए भगवान के मौसी के घर को बदला गया है.
कर उत्तर बंगाल विश्व विद्यालय के दो नंबर गेट के सामने एक भक्त के घर को इसके लिए चिन्हित किया गया है. एक स्थान को चिन्हित किया गया है. रथयात्रा जब इस्कॉन में वापस लौटेगी तो यहां से भगवान जगन्नाथ,सुभद्रा और बलराम को कार से उनके मौसी घर पर पहुंचाया जायेगा. जहां सात दिनों तक उनकी पूजा अर्चना कि जायेगी.
श्री दास ने बताया कि इससे उल्टा रथ के समय लगने वाली जाम से शहर को राहत मिलेगी. साथ ही बागडोगरा, नक्सलबाड़ी, विधान नगर के भक्त भी भगवान का दर्शन कर सकेंगे. उन्होंने आगे बताया कि अगले वर्ष भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा तथा बलराम का अलग-अलग रथ निकालने की योजना भी है.
न्यूनतम मजदूरी तत्काल तय करने की मांग
आज बागान मालिकों को एक ज्ञापन भी दिया गया. इस मौके पर संयुक्त फोरम के और भी कई नेता उपस्थित थे. यहां बता दें कि चाय श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी को लेकर बैठक की तारीखों का सिलसिला पिछले दो साल से भी अधिक समय से जारी है. न्यूनतम मजदूरी के लिए फिर एक बार 12 जुलाई को कोलकाता में बैठक होगी.
इसके बाद फिर 17 जुलाई को सिलीगुड़ी के उत्तरकन्या में एक और बैठक की जायेगी. पिछले कई वर्षों से उत्तर बंगाल के चाय श्रमिक न्यूनतम मजदूरी की मांग कर रहे हैं. लेकिन अब तक उनके हाथ सिर्फ तारीख ही लगी है. पिछले बुधवार को भी न्यूनतम मजदूरी को लेकर सिलीगुड़ी स्थित मिनी सचिवालय उत्तरकन्या में त्रिपक्षीय बैठक की गयी थी.
इस बैठक में राज्य लेबर कमिश्नर जावेद अख्तर सहित अन्य अधिकारी, टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया की कोलकाता शाखा के प्रतिनिधि, उत्तर बंगाल चाय बागानों के मालिक , चाय श्रमिक संगठन ज्वाइंट फोरम के नेता व अन्य उपस्थित थे.
