असम के 11 बौने कलाकार सिलीगुड़ी में मचा रहे धमाल
सिलीगुड़ी: कौन कहता है बौने केवल सर्कस के जोकर या फिर समाज में हंसी के पात्र होते हैं. उनमें भी आम इंसानों के तरह ही जिंदगी जीने का जज्बा होता है. यह कहना आश्चर्य नहीं होगा कि उल्टे उनमें आम इंसानों से अधित क्षमता होती है. ऐसा ही कुछ जज्बा असम के कई बौनों में […]
उसने बताया कि आज सात साल पहले पवित्र दा ने हमारी प्रतिभाओं को पहचाना और हम सभी को अपने थियेटर ग्रुप ‘दपन द मिरर’ से जोड़ा. साथ ही असम के उदालगुड़ी जिला के तांग्ला नामक गांव में उनके द्वारा पांच बीघा जमीन पर बनाये गये ‘थियेटर विलेज’ में लाया. जहां हम सभी उनसे नाट्य कला सीखते हैं. वहीं पर खेती बाड़ी कर अपना संसार भी चलाते हैं. पवित्र दा के सान्निध्य में उन लोगों ने किनो कैनो व रांग नंबर जैसे अब-तक कुल पांच नाटकों को संपादित कर चुके हैं. जिनका पूरे देश में मंचन भी किया जा रहा है. ऐसा ही कुछ कहना है दिलीप काकोटी, रंजीत दास, नयन दइमारी, तोरा सोना, रंजू वेश्य, थिमथियास तिर्की, धन दास, सिबिरिना देइमारी व अन्य युवक-युवती और महिला-पुरुष बौने नाट्य कलाकारों का भी.
2003 में ‘दर्पण द मिरर’ नामक अपना थियेटर ग्रुप स्थापित किया. 2008 में बौनों को लेकर समाज की भ्रांतियों को दूर करने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की ठानी. इसके लिए सबसे पहले उन्होंने असम के विभिन्न क्षेत्रों से बौनों को अपने थियेटर ग्रुप से जोड़ा. बाद में तकरीबन 20-25 बौनों और उनके पूरे परिवार को लेकर असम के ही तांग्ला गांव में अपना थियेटर विलेज बनाया. नाट्य कला को लेकर सबसे पहले उन सभी को 45 दिनों के कार्यशाला में प्रशिक्षित किया.
यहीं उनकी प्रतिभा को परखा गया. जिसने नाट्य कला में रुचि दिखायी उन सभी को नाटक के हरेक पहलुओं की जानकारी दी गयी और कला का पूरा अभ्यास कराया गया. बाद में 2012 से उम्दा नाट्यकारों को लेकर पवित्र ने कई नाटकों को संपादित किया जिसे आज पूरी दुनिया के सामने पेश किया जा रहा है. पवित्र की माने तो आज उनके थियेटर ग्रुप की ख्याति इतनी फैल चुकी है कि देश के विभिन्न प्रांतों से भी कई बौने कलाकार उनकी ग्रुप में शामिल होना चाहते हैं. हाल ही में पुणे से चार बौने कलाकार उनकी ग्रुप से जुड़ चुके हैं.
