रनवे के पास सौर ऊर्जा से फैलेगा उजाला
कोलकाता. पारंपरिक बिजली के स्थान पर सौर ऊर्जा या ग्रीन एनर्जी के लाभ के कारण इसके प्रचलन को केंद्र व राज्य सरकारें बढ़ावा दे ही हैं. लेकिन महानगरों में बनते कंक्रीट के जंगल के कारण ग्रीन एनर्जी योजना के लिए स्थान एक चुनौती थी, जिससे पार पा लिया गया है. अब सौर ऊर्जा उत्पादन के […]
कोलकाता. पारंपरिक बिजली के स्थान पर सौर ऊर्जा या ग्रीन एनर्जी के लाभ के कारण इसके प्रचलन को केंद्र व राज्य सरकारें बढ़ावा दे ही हैं. लेकिन महानगरों में बनते कंक्रीट के जंगल के कारण ग्रीन एनर्जी योजना के लिए स्थान एक चुनौती थी, जिससे पार पा लिया गया है. अब सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए महानगरों में हवाई-अड्डों के खाली पड़े रनवे का इस्तेमाल किया जायेगा. जानकारों की मानें तो एयरपोर्ट के रनवे के आस-पास लाखों एकड़ जमीन खाली होती है.
इसका इस्तेमाल सौर ऊर्जा के उत्पादन में किया जा सकता है. इस बात को कोलकाता एयरपोर्ट अथॉरिटी ने समझा और इस ओर काम भी शुरू कर दिया है. यहां एयरपोर्ट के रनवे के पास की खाली पड़ी जमीन पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जा रहा है. 65 एकड़ में बन रहे इस प्लांट पर 88 करोड़ की लागत आ रही है. इस संयंत्र के बनने के बाद दमदम एयरपोर्ट देश का पहला हवाई अड्डा होगा, जिसके पास इतना बड़ा वैकल्पिक ऊर्जा का संयंत्र होगा. इतना ही नहीं, यह कोलकाता का भी सबसे बड़ा वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत होगा. परियोजना की बड़ी खासियत यह होगी कि सोलर पैनल लगाने में भले ही 88 करोड़ की लागत आ रही हो, लेकिन लग जाने के बाद इससे एयरपोर्ट अथॉरिटी को प्रति वर्ष 15 करोड़ रुपये की बचत होगी.
इस बाबत कोलकाता एयरपोर्ट के निदेशक अतुल दीक्षित कहते हैं कि सौर पैनल लग चुके हैं और सीईएससी ग्रिड में पावर सप्लाइ से पहले उनका परीक्षण चल रहा है. श्री दीक्षित ने बताया कि रनवे के पूर्व में 65 एकड़ जमीन खाली पड़ी है, जिस पर उक्त संयंत्र लगाया जा रहा है.
संयंत्र में कुल 45,454 सौर पैनल लगाये गये हैं, जिनमें हर पैनल से 330 वॉट बिजली पैदा होगी. श्री दीक्षित ने आगे बताया कि संयंत्र में कुल 15 मेगावाट सौर ऊर्जा के उत्पादन की क्षमता होगी. हम उम्मीद करते हैं कि यहां से प्रति माह 1.3 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होगी. यानी हम इस ऊर्जा से 1000 घरों को रौशन कर सकेंगे.
गौरतलब है कि एक वर्ष पहले कोलकाता एयरपोर्ट पर एक रूफटॉप सोलर प्लांट भी लगाया गया है, जिसकी सौर ऊर्जा उत्पाद करने की क्षमता दो मेगावाट है. इसे लगाने में 10.05 करोड़ रुपये की लागत आयी थी. श्री दीक्षित का दावा है कि इस संयंत्र के लगने के बाद एयरपोर्ट का काफी लाभ होगा. हमें उम्मीद है कि सौर ऊर्जा के शुरू होने के बाद हम हर माह 4.75 करोड़ से छह करोड़ रुपये तक की बिजली बचा पाएंगे. बिजली बचत का यह आंकड़ा एक वर्ष में 15 करोड़ रुपये हो सकता है. संयंत्र लगने के बाद बिलिंग के लिए सीईएससी के साथ नेट-मीटरिंग का समझौता भी हो चुका है.
साैर ऊर्जा संरक्षण पर नया पीजी कोर्स
अक्तूबर में साैर ऊर्जा पर एक पोस्ट-ग्रेजुएट कोर्स शुरू किया जायेगा. इसके लिए अमेटी यूनिवर्सिटी व एनबी इंस्टीट्यूट फॉर रूरल डेवलपमेंट (एनबीआइआरटी) के बीच एक करार किया गया है. एक साल का कोर्स अमेटी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ध्रुबज्योति चट्टोपाध्याय ने शुरू किया है. यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी ने बताया कि पर्यावरण के संरक्षण व ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन इंजीनियर बनाये जा रहे हैं. इसके लिए छात्रों को विशेष प्रशिक्षण दिया जायेगा. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह योजना है कि 2022 तक 1 लाख मेगावाट सोलर प्रोजेक्ट शुरू किये जायेंगे. साैर ऊर्जा पर पीजी कोर्स, एनबीआइआरटी के अधिकारी एस पी गन चाैधरी के दिमाग की उपज है. रिन्यूबल एनर्जी विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने अाशदेन अवॉर्ड हासिल किया है. अभी वे राज्य सरकार के बिजली विभाग के सलाहकार भी हैं. उनका कहना है कि भारत को बड़े सोलर फील्ड इंजीनियर्स की जरूरत है, ताकि 100000 मेगावाट साैर ऊर्जा का लक्ष्य 2022 तक पूरा किया जा सके. साैर ऊर्जा के क्षेत्र में कई अनुसंधान अभी हो रहे हैं. योजना को चालू करने में श्री चाैधरी की बड़ी भूमिका है.
