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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले वोटर लिस्ट शुद्धिकरण के लिए चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के लिए राज्य सरकार ग्रुप बी के 8505 अधिकारी चुनाव आयोग को उपलब्ध करायेगा. बंगाल सरकार की ओर से निर्वाचन आयोग को यह जानकारी दी गयी है.
चुनाव आयोग का आरोप- बंगाल सरकार ने ग्रेड-2 के सिर्फ 80 अफसर दिये
यह बात इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में निर्वाचन आयोग के वकील ने दलील दी थी कि पश्चिम बंगाल सरकार ने एसआईआर प्रक्रिया की देख-रेख के लिए ‘ग्रेड 2’ के केवल 80 ऑफिसर्स उपलब्ध करवाये हैं.
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जैसे निम्न श्रेणी के कर्मचारी देने का आरोप
चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा था कि बंगाल सरकार ने एसआईआर की देखरेख के लिए एसडीएम लेवल के सिर्फ 80 ‘ग्रेड 2’ अधिकारी दिये हैं. यह भी कहा कि सरकार ने इसके लिए केवल आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं जैसे निम्न श्रेणी के सरकारी कर्मचारियों ही आयोग को उपलब्ध कराये थे.
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चुनाव आयोग के आरोपों का ममता बनर्जी ने किया खंडन
ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग के इन आरोपों का खंडन किया. कहा कि राज्य सरकार ने निर्वाचन आयोग द्वारा मांगी गयी सभी सेवाएं प्रदान की थीं. सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ बनर्जी की याचिका का संज्ञान लिया. कहा कि योग्य व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची में बने रहने चाहिए. कोर्ट ने निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से 9 फरवरी तक जवाब देने के लिए कहा.
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ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही है सुनवाई
एसआईआर के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. 4 फरवरी को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ सोमवार को पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करने वाली है, जिसमें राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दायर याचिका भी शामिल है.
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ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 9 को
खबर है कि बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी 9 फरवरी को फिर से सुप्रीम कोर्ट जा सकतीं हैं. 4 फरवरी को पश्चिम बंगाल की सीएम एपेक्स कोर्ट में पेश हुईं थीं और दलीलें भी पेश की थी. मुख्यमंत्री रहते कोर्ट में दलील रखने वाली वह देश की पहली चीफ मिनिस्टर बन गयीं.
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