कोलकाता से अमर शक्ति प्रसाद की रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल में सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक नयी रूपरेखा तैयार की गयी है. पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पतंगबाजी को जीवंत रखने के लिए हाल ही में बड़े पैमाने पर एक पतंग उत्सव का आयोजन किया गया. अब पर्यटन को बढ़ावा देने और राज्य की लोक संस्कृति को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए सरकार और प्रशासन कई नए आयोजनों की योजना बना रहा है. यह जानकारी राज्य के पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने दी.
बंगाली संस्कृति को पुनर्जीवित करना उद्देश्य
उन्होंने बताया कि प्राचीन काल से जुड़ी हमारी संस्कृति और परंपराएं धीरे-धीरे आधुनिकता और तकनीकी बदलावों के कारण पीछे छूट रही हैं. पुरानी परंपराओं और बंगाली संस्कृति को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से ही बड़े पैमाने पर पतंग उत्सव का आयोजन किया गया था. उन्होंने बताया कि राज्य में एक बार फिर ''पुकुर उत्सव'' (झील उत्सव) आयोजित करने पर विचार किया जा रहा है. इसके अलावा, ऑरेंज फेस्टिवल और टी फेस्टिवल की तर्ज पर पर्यटन विभाग के माध्यम से कई नये उत्सव शुरू किये जायेंगे.
पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
''पलाश उत्सव'' से बढ़ेगा पर्यटन
पुरुलिया में प्रकृति की सुंदरता और लाल-पीले पलाश के फूलों को केंद्र में रखकर ''पलाश उत्सव'' आयोजित करने का भी प्रस्ताव मिला है, जिस पर गंभीरता से विचार चल रहा है. मंत्री ने कहा कि सांस्कृतिक आयोजनों के साथ-साथ पर्यटन के बुनियादी ढांचे को भी आधुनिक और बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है. विभिन्न आयोजनों के जरिये पश्चिम बंगाल की समृद्ध परंपरा, कला और संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर करना ही मुख्य लक्ष्य है.
Also Read: शुभेंदु अधिकारी ने ठुकराई विश्व हिंदू परिषद की मांग, बोले- दुर्गा पूजा में मांसाहार पर रोक नहीं
