बंगाल में वोटिंग का महा-रिकॉर्ड भी नहीं तोड़ पाया त्रिपुरा का 2013 का वो कीर्तिमान

West Bengal Election 2026 Record Voting: बंगाल चुनाव 2026 में 92.67 प्रतिशत रिकॉर्ड मतदान हुआ, लेकिन त्रिपुरा का वर्ष 2013 वाला 93.61 फीसदी वोटिंग का रिकॉर्ड अब भी कायम है. जानें असम, पुडुचेरी और तमिलनाडु में कैसा रहा वोटिंग प्रतिशत और महिलाओं ने कैसे बनाया रिकॉर्ड.

West Bengal Election 2026 Record Voting: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 ने मतदान के मामले में इतिहास रच दिया है. आजादी के बाद पहली बार बंगाल में 92.67 प्रतिशत वोटिंग हुई है, जिसने नगालैंड और मणिपुर जैसे राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है. लेकिन, बावजूद इसके एक रिकॉर्ड ऐसा है, जो अब भी अटूट है. निर्वाचन आयोग (ECI) के आंकड़ों के मुताबिक, सर्वाधिक मतदान का नेशनल रिकॉर्ड आज भी त्रिपुरा के नाम है. वर्ष 2013 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में 93.61 फीसदी वोटिंग हुई थी, जो आज भी देशभर में मिसाल बनी हुई है.

बंगाल में महिलाओं ने मारी बाजी

पश्चिम बंगाल में इस बार की चुनावी भागीदारी ने पिछले सभी स्थानीय रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिये हैं. इससे पहले बंगाल में सर्वाधिक मतदान का रिकॉर्ड 2011 में 84.72 प्रतिशत था. इस बार राज्य ने सीधे 92.67 फीसदी का आंकड़ा छूकर सबको चौंका दिया है. पहले चरण में महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया. पुरुषों का मतदान प्रतिशत 90.92 रहा, तो 92.69 प्रतिशत महिलाओं ने बूथों पर पहुंचकर लोकतंत्र को मजबूती दी है.

त्रिपुरा का अजेय रिकॉर्ड

पूर्वोत्तर के राज्यों त्रिपुरा, नगालैंड और मणिपुर में 90 प्रतिशत से अधिक मतदान होना एक सामान्य प्रक्रिया रही है. वर्ष 2013 में त्रिपुरा ने 93.61 प्रतिशत मतदान दर्ज किया था, जो भारत के चुनावी इतिहास में किसी भी राज्य द्वारा दर्ज किया गया सबसे अधिक प्रतिशत है. बंगाल की जबर्दस्त लहर के बाद भी त्रिपुरा का यह ‘ताज’ सुरक्षित है.

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अन्य राज्यों में भी टूटा मतदान का रिकॉर्ड

हाल के विधानसभा चुनावों में केवल बंगाल ही नहीं, बल्कि कई अन्य राज्यों में भी मतदाताओं का उत्साह चरम पर रहा. पुडुचेरी में 89.83 फीसदी और असम में 85.38 फीसदी मतदान हुआ. दोनों ने अपने पुराने सभी चुनावी भागीदारी के रिकॉर्ड्स तोड़ दिये हैं. तमिलनाडु में 84.69 प्रतिशत मतदान हुआ, जिसने 2011 के 78.29 फीसदी के उच्चतम स्तर को काफी पीछे छोड़ दिया है.

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West Bengal Election 2026 Record Voting: क्या हैं बढ़ते वोट प्रतिशत के मायने?

चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि मतदान के प्रतिशत में यह बढ़त जनता की बढ़ती जागरूकता और सत्ता के प्रति उनके स्पष्ट नजरिये को दर्शाती है. बंगाल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी सीधे तौर पर कल्याणकारी योजनाओं और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों से जोड़कर देखी जा रही है. देखना है कि 4 मई को जब नतीजे आयेंगे, तो यह ‘भारी मतदान’ किस पार्टी की किस्मत चमकाता है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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