कोलकाता से शिव कुमार राउत की रिपोर्ट
बारिश के साथ राज्य में डेंगू का खतरा बढ़ने लगा है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अब तक डेंगू से सात लोगों की मौत हुई है. वहीं, पिछले एक सप्ताह में डेंगू जैसे लक्षणों के साथ करीब 800 मरीज अस्पतालों में भर्ती हुए हैं. इनमें पांच की हालत गंभीर बतायी जा रही है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में एक जनवरी से 23 अगस्त के बीच राज्य में डेंगू के 387 मामले दर्ज किये गये थे, जबकि इस वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 327 रही.
2024 में हुई थीं 31 मौतें
आम तौर पर पिछले वर्ष की तुलना में डेंगू के मामलों में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी देखी जाती है, लेकिन इस बार यह कमी करीब 15 प्रतिशत ही रही है. इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गयी है. मृत्यु के आंकड़ों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में भी अंतर सामने आया है. इस वर्ष 10 डेंगू संक्रमितों की मौत हुई है, लेकिन मृत्यु समीक्षा समिति ने सात मामलों में डेंगू को मौत का प्रमुख कारण माना है. बाकी तीन मरीज डेंगू संक्रमित थे, लेकिन उनकी मौत के पीछे अन्य स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं को जिम्मेदार बताया गया है. वर्ष 2025 में डेंगू से 19 और 2024 में 31 मौतें हुई थीं.
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स्वास्थ्य मंत्री ने जतायी नाराजगी
इधर, शहर में जगह-जगह जमा पानी को लेकर स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय ने नाराजगी जतायी है. उन्होंने सौंदर्यीकरण के नाम पर बनाये गये अनुपयोगी कृत्रिम तालाबों और जलाशयों के रखरखाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि इनमें पानी जमा रहने से मच्छरों के लार्वा पनप रहे हैं. उन्होंने ऐसे जलाशयों के उचित रखरखाव अथवा इस तरह की व्यवस्था को बंद करने की सलाह दी है. हालांकि, कोलकाता नगर निगम के मुख्य कीट विज्ञानी देवाशीष विश्वास ने कहा कि स्थिति अभी पूरी तरह नियंत्रण से बाहर नहीं हुई है. उन्होंने लोगों से अपने आसपास पानी जमा नहीं होने देने और मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए विशेष सावधानी बरतने की अपील की.
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