मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को मिलेगी कितनी सैलरी? पूर्व CM ममता बनर्जी को क्या-क्या मिलेंगी सुविधाएं

West Bengal CM Suvendu Adhikari Salary: पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के वेतन और भत्तों का पूरा विवरण. साथ ही जानें, 15 साल तक बिना सैलरी काम करने वाली ममता बनर्जी को अब पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में क्या सुविधाएं और कितनी पेंशन मिलेगी.

West Bengal CM Suvendu Adhikari Salary: शुभेंदु अधिकारी के शपथ लेने के साथ ही पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नये युग की शुरुआत हो चुकी है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पहली बार राज्य में सरकार बनायी. शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बन चुके हैं. चीफ मिनिस्टर बनने के साथ ही अब शुभेंदु को वे तमाम सरकारी सुविधाएं, वेतन और भत्ते मिलेंगे, जो इस संवैधानिक पद के लिए निर्धारित हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री को मिलेंगी कई सुविधाएं

राज्य की 15 साल तक कमान संभालने वाली ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ममता बनर्जी अब पूर्व मुख्यमंत्री (Ex-CM) के रूप में नयी भूमिका और सुविधाओं की हकदार होंगी. आइए, जानते हैं कि बंगाल के नये और पूर्व मुखिया को राज्य सरकार के खजाने से क्या-क्या मिलने वाला है.

शुभेंदु अधिकारी की मंथली सैलरी

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शुभेंदु अधिकारी के वेतन और भत्ते काफी प्रभावशाली हैं. उन्हें हर महीने लगभग 2.10 लाख रुपए वेतन मिलेंगे. इसमें 50 हजार रुपए बेसिक, 1 लाख रुपए विशेष वेतन और 51,600 रुपए का सत्कार (Hospitality) भत्ता शामिल है.

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West Bengal CM Suvendu Adhikari Salary: मुख्यमंत्री को और कौन-कौन से भत्ते मिलेंगे

  • विधायक के रूप में निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं और कार्यालय के लिए 48,000 रुपए का भत्ता
  • 2000 रुपए प्रतिदिन का सिटिंग अलाउंस (60 हजार रुपए महीना)
  • सरकारी आवास
  • सरकारी वाहन
  • स्टाफ
  • टेलीफोन
  • इंटरनेट बिल
  • Z+ कैटेगरी की सुरक्षा
  • मुफ्त इलाज
  • मुफ्त यात्रा भत्ता

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ममता बनर्जी ने 15 साल तक नहीं ली सैलरी, अब क्या होगा?

ममता बनर्जी ने अपने कार्यकाल के दौरान कभी वेतन नहीं लिया. उन्होंने एक साक्षात्कार में खुलासा किया था कि उनका खर्च उनकी किताबों की रॉयल्टी, पेंटिंग्स और गीतों से चलता है. ममता ने 100 से ज्यादा किताबें लिखी हैं, जिनसे उन्हें सालाना 10 से 11 लाख रुपए रॉयल्टी मिलती है. उनके लिखे गीतों से भी करीब 3 लाख रुपए की हर साल कमाई हो जाती है.

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पेंशन का गणित

पश्चिम बंगाल वेतन और भत्ता अधिनियम के तहत अब उन्हें पूर्व सांसद (Ex-MP) के रूप में करीब 31,000 रुपए मूल पेंशन मिलेगी. सांसद के रूप में उनके लंबे कार्यकाल (25-30 साल) को देखते हुए, यह राशि 80 हजार से 1 लाख रुपए प्रति माह तक पहुंच सकती है.

पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में मिलेंगी ये सुविधाएं

  • पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें रहने के लिए सरकारी घर दिया जाएगा.
  • मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं और उचित सुरक्षा कवर मिलता रहेगा.
  • निजी कार्यों और कार्यालय के लिए सरकारी स्टाफ की सुविधा भी उपलब्ध होगी.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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