75 मुस्लिम समुदाय समेत 77 जातियों का ओबीसी दर्जा खत्म, शुभेंदु अधिकारी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से वापस ली याचिका

WB OBC Reservation Case: पश्चिम बंगाल सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली अपनी याचिका सुप्रीम कोर्ट से वापस ले ली है, जिसमें 77 जातियों का OBC दर्जा रद्द कर दिया गया था. राज्य मंत्रिमंडल के फैसले के बाद अब इस मामले में नया कानूनी मोड़ आया है.

WB OBC Reservation Case: पश्चिम बंगाल में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण से जुड़े एक अहम मामले में नया कानूनी मोड़ आया है. पश्चिम बंगाल सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से अपनी वह याचिका वापस ले ली, जिसमें कलकत्ता हाईकोर्ट के चर्चित फैसले को चुनौती दी गयी थी. हाईकोर्ट ने 75 मुस्लिम समुदायों सहित कुल 77 जातियों का ओबीसी (OBC) दर्जा रद्द कर दिया था. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ के समक्ष राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका वापस लेने का आग्रह किया.

राज्य मंत्रिमंडल ने लिया याचिका वापस लेने का निर्णय

अदालत में मामले का उल्लेख करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को सूचित किया कि राज्य मंत्रिमंडल ने इस अपील को वापस लेने का औपचारिक निर्णय लिया है. इसके साथ ही, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (State Backward Classes Commission) को भी शीर्ष अदालत ने अपनी अलग से दाखिल अपील वापस लेने की मंजूरी दे दी. सुप्रीम कोर्ट की 3 सदस्यीय पीठ ने राज्य सरकार की अर्जी को स्वीकार करते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी. हालांकि, पीठ ने कहा कि इस फैसले से प्रभावित कोई भी अन्य पक्ष यदि व्यक्तिगत या समूह के स्तर पर अपील आगे बढ़ाना चाहता है, तो उसे इसकी पूरी छूट होगी.

क्या था पूरा विवाद?

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल के दौरान बनाये गये ओबीसी नियमों के तहत कई जातियों को सूची में जोड़ा गया था. हालांकि, कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में 75 मुस्लिम समुदायों समेत कुल 77 जातियों को दी गयी ओबीसी श्रेणी की मान्यता को प्रक्रियागत अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए रद्द कर दिया था.

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हाईकोर्ट के खिलाफ ममता बनर्जी सरकार गयी थी सुप्रीम कोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ तत्कालीन ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. अब वर्तमान सरकार (शुभेंदु अधिकारी की सरकार)द्वारा इस याचिका को वापस लिये जाने के बाद राज्य में पिछड़ा वर्ग आरक्षण की पुरानी स्थिति और कानूनी दिशा को लेकर नये सिरे से चर्चा शुरू हो गयी है.

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By Mithilesh Jha

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