तबला वादकों ने उस्ताद जाकिर हुसैन के कोलकाता से संबंध को किया याद

उस्ताद जाकिर हुसैन दूसरों के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए अक्सर ”बहुत अच्छा” शब्द का इस्तेमाल करते थे

कोलकाता. उस्ताद जाकिर हुसैन दूसरों के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए अक्सर ””बहुत अच्छा”” शब्द का इस्तेमाल करते थे और इन्हीं शब्दों के साथ दक्षिण कोलकाता के तबला निर्माता श्यामल कुमार दास उन्हें याद कर रहे हैं. दिग्गज तबला वादक हुसैन (73) का सैन फ्रांसिस्को के एक अस्पताल में सोमवार को निधन हो गया. वर्षों पहले नेताजी इंडोर स्टेडियम में एक संगीत समारोह में उस्ताद से हुई एक आकस्मिक मुलाकात को याद करते हुए दास ने उन्हें “सौम्य और विनम्र” व्यक्ति बताया और कहा कि उन्होंने “कभी भी दूसरों की कला को कमतर नहीं आंका.” चेतला क्षेत्र में नारायण वाद्य भंडार नामक लोकप्रिय संगीत वाद्ययंत्र दुकान के मालिक दास हुसैन के लिए उपहार स्वरूप एक जोड़ी तबला लेकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे थे. दास ने कहा, “जब मैंने उन्हें तबला सौंपा तो उन्होंने मुझे बहुत धन्यवाद दिया और वादा किया कि जब भी संभव होगा, वह इसे बजाएंगे.

इसके बाद, मैं उनसे कई अन्य संगीत समारोहों में मिला.” दास ने कहा कि पंडित अनिंद्य कुमार बोस, पंडित समीर चटर्जी, पंडित बिक्रम घोष और पंडित तन्मय बोस जैसे उस्तादों ने उनके बनाये संगीत वाद्ययंत्रों का उपयोग किया है. उन्होंने दो दशक पहले हुसैन से प्राप्त एक आकस्मिक संदेश को याद किया, जब उस्ताद विलायत खान के साथ निर्धारित जुगलबंदी से पहले उनके तबले में कुछ समस्या उत्पन्न हो गयी थी. दास ने कहा कि एक बार हुसैन उन्हें होटल में मिले तो कहा कि यह तबला जरा ठीक कर दी दीजिए. दास ने कहा कि उन्होंने तबला ठीक कर दिया, जिससे हुसैन संतुष्ट हुए और उनका बहुत आभार व्यक्त किया. एक और वाकये का जिक्र करते हुए दास ने कहा कि एक बार वह रवींद्र सदन के मंच के पीछे तबले लेकर जा रहे थे, तो हुसैन ने उन्हें पकड़कर तबले दिखाने के लिए कहा. दास ने कहा कि इसके बाद हुसैन ने उनसे कहा, “आपके तबले के कुछ स्केल में सुधार की जरूरत थी. मैंने सी-शार्प जैसे स्केल को ठीक कर दिया है.” दास ने कहा, ‘‘कई शास्त्रीय वाद्य यंत्र निर्माताओं ने उन्हें तबला उपहार में दिया था और अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरने पर भी उन्होंने कभी किसी भी वाद्ययंत्र की बुरायी नहीं की. उनका व्यवहार बहुत सौम्य और दिल बहुत बड़ा था.’’

दास ने कहा कि वह एक बात बहुत कहते थे, जो मुझे आज भी याद आ रही है और वह है “बहुत अच्छा.” टॉलीगंज क्षेत्र की मुक्ता दास को भी हुसैन के लिए तबला बनाने के कुछ अवसर मिले थे. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे याद है कि दादा (हुसैन) ने एक बार कोलकाता की अपनी यात्रा के दौरान मुझसे कहा था, ‘मेरे लिए कुछ बनाओ.’’

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat khabar news desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >