जमीन अधिग्रहण नहीं होने से वाराणसी कोलकाता एक्सप्रेसवे परियोजना अटकी

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने बुधवार को राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य द्वारा पूछे गये प्रश्न के जवाब में बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जमीन अधिग्रहण नहीं किये जाने के कारण वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेस परियोजना अधर में अटकी है.

कोलकाता

. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने बुधवार को राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य द्वारा पूछे गये प्रश्न के जवाब में बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जमीन अधिग्रहण नहीं किये जाने के कारण वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेस परियोजना अधर में अटकी है.

गौरतलब है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व सांसद शमिक भट्टाचार्य ने वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य और उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड व पश्चिम बंगाल में इसकी प्रगति के बारे में केंद्रीय मंत्री से जवाब मांगा था.

सांसद के प्रश्न का लिखित में जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में योजन��� के लिए जमीन का अधिग्रहण अब तक नहीं किया गया है, जबकि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण निविदाएं तैयार करके बैठा है और जमीनदाताओं को बाजार दरों से अधिक मुआवजा देने का प्रस्ताव है. बावजूद इसके, राज्य सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण की धीमी गति के कारण योजना अधर में अटकी है.

केंद्रीय मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में सिर्फ कुछ स्थानों को छोड़ कर वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे के निर्माण का कार्य आवंटित कर दिया गया है. इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में भी खंड के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का कार्य भी आवंटित कर दिया गया है.

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वाराणसी-रांची-कोलकाता के लिए संबंधित परियोजना को केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया था और इस पर पश्चिम बंगाल सरकार ने भी सहमति दी थी. राज्य सरकार के अनुरोध पर संशोधित संरेखण को अक्तूबर 2024 में मंजूरी दी गयी थी.

इसे लेकर भाजपा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने तृणमूल सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ही बंगाल की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा हैं. जब तक वह नहीं जातीं, राज्य पिछड़ता ही रहेगा. 2026 में ही हालात बदलने शुरू होंगे. उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे का निर्माण शुरू हो चुका है, लेकिन पश्चिम बंगाल में यह परियोजना अभी भी पिछड़ रही है. केंद्र सरकार ने पुरुलिया, बांकुड़ा और हुगली में भूमि अधिग्रहण की अधिसूचनाएं पूरी कर ली हैं, लेकिन राज्य सरकार द्वारा बार-बार संरेखण बदलने के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है. उन्होंने कहा कि बंगाल खंड के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) अभी भी तैयार की जा रही है, जबकि अन्य राज्य पूरी गति से आगे बढ़ रहे हैं.

क्या है वाराणसी- कोलकाता एक्सप्रेसवे परियोजना

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 फरवरी, 2024 को वाराणसी- कोलकाता एक्सप्रेसवे के नाम से मशहूर इस परियोजना की आधारशिला रखी थी. यह नया मार्ग वाराणसी को कोलकाता से जोड़ने वाले ऐतिहासिक ग्रैंड ट्रंक रोड (जीटी रोड) के अतिरिक्त होगा. वहीं, वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे कोलकाता को वाराणसी, पश्चिम बंगाल, रांची और झारखंड से भी जोड़ेगा. गौरतलब है कि यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे सीधे कोलकाता एक्सप्रेसवे से जुड़ जायेगा और इससे वाराणसी से कोलकाता की यात्रा 12-14 घंटे से घटकर महज छह घंटे की रह जायेगी. जानकारी के मुताबिक, 35000 करोड़ रुपये की लागत वाले इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जा रहा है, जिसकी लंबाई लगभग 710 किलोमीटर होगी.

केंद्रीय परियोजनाओं में बाधा डाल रही है तृणमूल सरकार : अमित मालवीय

कोलकाता. भाजपा के आईटी सेल प्रमुख और बंगाल भाजपा के सह प्रभारी अमित मालवीय ने बुधवार को राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर केंद्रीय परियोजनाओं में लगातार विलंब कराने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि वाराणसी–कोलकाता एक्सप्रेसवे परियोजना अब भी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) के स्तर पर अटकी हुई है और इसका मुख्य कारण राज्य सरकार की टालमटोल की नीति है. श्री मालवीय ने कहा है कि वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे की प्रगति उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में काफी आगे बढ़ चुकी है, लेकिन पश्चिम बंगाल में यह अब भी डीपीआर चरण में है. उन्होंने कहा कि यह एक्सप्रेसवे बनने के बाद कनेक्टिविटी आर्थिक विकास का गेम-चेंजर साबित होगा. यह न केवल बंगाल को सीधे उत्तर प्रदेश और बिहार से जोड़ेगा बल्कि व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसर को भी बढ़ायेगा.

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Published by: Bijay kumar

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