संवाददाता, कोलकाता
राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया के जरिये गरीब और हाशिये पर मौजूद लोगों को सुनियोजित तरीके से मताधिकार से वंचित किया जा रहा है. पार्टी ने दावा किया कि कूचबिहार दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के फलीमारी ग्राम पंचायत के 4/54 नंबर बूथ के निवासी व दैनिक मजदूर अश्विनी अधिकारी और उसकी पत्नी शिवानी अधिकारी, जो जीवित हैं, काम कर रहे हैं और मतदान करते रहे हैं, उन्हें संशोधित मतदाता सूची के पहले ड्राफ्ट में मृत घोषित कर दिया गया है. तृणमूल ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट करके बताया कि अश्विनी व उसकी पत्नी ने समय पर गणना फॉर्म जमा किया था और सभी निर्देशों का पालन किया था. इसके बावजूद उनका नाम सूची से हटा दिया गया. पार्टी ने इसे मताधिकार की संस्थागत हत्या करार दिया है. तृणमूल का कहना है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है. कूचबिहार और सिलीगुड़ी में भी ऐसे कई मामले सामने आये हैं. इतना ही नहीं, हुगली के डानकुनी नगरपालिका के वार्ड 18 के एक निर्वाचित पार्षद को भी, जिनका नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज है और जो जीवित हैं, मृत मतदाता बताकर सूची से हटा दिया गया.
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