कोलकाता.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर युगावतार श्रीश्रीरामकृष्ण परमहंस देव की जन्मतिथि पर उन्हें श्रद्धापूर्वक प्रणाम अर्पित किया. उन्होंने कहा कि बंगाल की भूमि उनके आविर्भाव से धन्य हुई है और उनकी अमृतवाणी व सर्वधर्म समन्वय का आदर्श आज भी समाज के लिए आलोकस्तंभ है. पोस्ट में ममता बनर्जी ने बताया कि श्रीरामकृष्ण परमहंस से जुड़े तीर्थस्थलों के विकास के लिए राज्य सरकार ने व्यापक कार्य किये हैं. दक्षिणेश्वर काली मंदिर परिसर को अंतरराष्ट्रीय स्तर का धार्मिक और पर्यटन स्थल बनाने के लिए ‘रानी रासमणि स्काईवॉक’, मंदिर परिसर की आकर्षक प्रकाश-सज्जा, सौंदर्यीकरण, जीर्णोद्धार और नया जेटी बनाया गया है. उन्होंने यह भी बताया कि रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने दक्षिणेश्वर रेलवे स्टेशन को काली मंदिर की तर्ज पर सजाया था.मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीरामकृष्ण की जन्मभूमि कामारपुकुर और मां शारदा की जन्मभूमि जयरामबाटी के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है. इसके लिए ‘जयरामबाटी–कामारपुकुर डेवलपमेंट बोर्ड’ का गठन किया गया और अब तक बोर्ड को 10 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है. इन पवित्र तीर्थ क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे के विकास में पहले ही लगभग 80 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किये गये हैं.
उन्होंने बताया कि लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से सड़क संपर्क बेहतर किया गया है और 5.87 करोड़ रुपये से पर्यटन अवसंरचना विकसित की गयी है. स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए कामारपुकुर ब्लॉक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का उन्नयन और ग्रामीण अस्पताल में विशेष हेल्थ यूनिट की स्थापना की गयी है. यात्रियों व पर्यटकों की सुविधा के लिए करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक बस स्टैंड और एक इको-टूरिज्म पार्क भी बनाया गया है.रामकृष्ण परमहंस के लिए ””स्वामी”” शब्द पर सीएम ने जतायी आपत्ति
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रामकृष्ण परमहंस की जयंती पर सोशल मीडिया पोस्ट में ‘स्वामी’ शब्द का इस्तेमाल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने राज्य की महान हस्तियों के प्रति सांस्कृतिक असंवेदनशीलता दिखायी है. सुश्री बनर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में ‘स्वामी’ संबोधन का इस्तेमाल किया है जबकि उन्हें व्यापक रूप से ‘ठाकुर’ उपनाम से संबोधित किया जाता है. उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘फिर से स्तब्ध! एक बार फिर हमारे प्रधानमंत्री ने बंगाल की महान हस्तियों के प्रति अपनी सांस्कृतिक असंवेदनशीलता को आक्रामक ढंग से पेश किया है. आज युगावतार रामकृष्ण परमहंसदेव की जन्मतिथि है. उन्होंने कहा कि इस अवसर पर महान संत का सम्मान करने की कोशिश में हमारे प्रधानमंत्री ने उनके नाम के साथ एक अप्रत्याशित और अनुचित शब्द ‘स्वामी’ जोड़ दिया. ममता बनर्जी ने कहा कि रामकृष्ण को श्रद्धा से ठाकुर (ईश्वर के समान) कहा जाता था. उनके निधन के बाद उनके संन्यासी शिष्यों ने रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना की और भारतीय परंपरा के अनुसार उन संन्यासियों को ‘स्वामी’ कहा गया. लेकिन उन्हें ठाकुर के रूप में ही संबोधित किया जाता रहा. ममता बनर्जी ने कहा कि ‘स्वामी’ शब्द रामकृष्ण परमहंस के शिष्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, न कि उनके लिए. उन्होंने कहा कि रामकृष्ण संप्रदाय में ‘स्वामी’ शब्द उनके शिष्यों के लिए होता है. लेकिन संप्रदाय की पवित्र त्रिमूर्ति ठाकुर-मां-स्वामीजी हैं. यहां ‘ठाकुर’ श्री श्री रामकृष्ण परमहंसदेव हैं, ‘मां’ मां शारदा हैं और ‘स्वामीजी’ स्वामी विवेकानंद हैं.’ ममता बनर्जी से प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध किया कि वह ‘बंगाल की महान हस्तियों के लिए ‘नये संबोधन’ गढ़ने से परहेज करें.