अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेंगे तृणमूल सांसद

तृणमूल कांग्रेस लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेगी. पार्टी नेताओं ने कहा कि यह मुद्दा सोमवार को संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन सदन में उठेगा.

कोलकाता/नयी दिल्ली.

तृणमूल कांग्रेस लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेगी. पार्टी नेताओं ने कहा कि यह मुद्दा सोमवार को संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन सदन में उठेगा. तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी लोकसभा के कई विपक्षी सदस्यों द्वारा लाये गये अविश्वास प्रस्ताव के साथ हमेशा से खड़ी थी. विपक्षी दलों के कम से कम 118 सांसदों ने ओम बिरला को सदन के अध्यक्ष पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव पेश करने का नोटिस दिया है. बिरला पर आरोप है कि उन्होंने पक्षपातपूर्ण तरीके से काम किया है. इससे पहले तृणमूल सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किये थे. तृणमूल कांग्रेस नेता ने बताया : हम हमेशा से अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में थे. हम इसे जल्दबाजी में नहीं लाना चाहते थे और इसीलिए बजट सत्र के पहले चरण के अंतिम भाग में हमने कहा था कि इसे तीन दिन बाद पेश किया जाये. सोमवार को जब नोटिस पर विचार किया जायेगा, तब बीमार सांसदों को छोड़ कर तृणमूल के लगभग सभी सांसद लोकसभा में उपस्थित रहेंगे. तृणमूल कांग्रेस के नेता इस मुद्दे पर इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया गठबंधन) के अन्य नेताओं के भी संपर्क में हैं.

लोकसभा ने ओम बिरला को अध्यक्ष पद से हटाने से संबंधित प्रस्ताव पेश करने के लिए विपक्षी सदस्यों के एक नोटिस को सोमवार के लिए सूचीबद्ध किया है. सोमवार की कार्यसूची में केवल इसी प्रस्ताव को शामिल किया गया है. सोमवार को अध्यक्ष द्वारा नाम पुकारे जाने पर सदन के 50 सदस्यों के खड़े होने पर प्रस्ताव को स्वीकृत मान लिया जायेगा. इसके बाद प्रस्ताव पर चर्चा की जायेगी और उस पर मतदान कराया जायेगा. यदि 50 सदस्य नोटिस के समर्थन में खड़े नहीं होते हैं, तो प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है. सत्तारूढ़ भाजपा और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने लोकसभा सदस्यों को इस मुद्दे पर विचार-विमर्श के दौरान सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है. संख्या बल सरकार के पक्ष में है, जिससे इस प्रस्ताव के खारिज होने की संभावना प्रबल है. संविधान के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष (इस मामले में बिरला) सदन में उपस्थित रह सकते हैं. वह अपना बचाव कर सकते हैं और प्रस्ताव पर मतदान कर सकते हैं, लेकिन जब मामले पर चर्चा की जायेगी, तो वह कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते. बिरला के खिलाफ प्रस्तावित प्रस्ताव में लोकसभा अध्यक्ष के आचरण पर सवाल उठाया गया. साथ ही, इसमें नेता प्रतिपक्ष व अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने की अनुमति नहीं देना और विपक्ष की महिला सांसदों के खिलाफ निराधार आरोप भी शामिल है. प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया है कि जनता से जुड़े मुद्दे उठाने पर विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया, जबकि पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ पूरी तरह आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां करने वाले सत्तारूढ़ दल के सदस्यों को कोई फटकार नहीं लगायी गयी. प्रस्ताव में यह भी आरोप लगाया गया है कि विपक्ष का मानना है कि बिरला ने सदन के सभी वर्गों का विश्वास हासिल करने के लिए आवश्यक निष्पक्ष रवैया अपनाना बंद कर दिया है.

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Published by: Bijay kumar

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