मिठाई बांटने पर बिफरी तृणमूल, भाजपा पर लगाया ‘ओबीसी विरोधी’ दल होने का आरोप

कलकत्ता हाइकोर्ट की खंडपीठ ने हाल ही में राज्य सरकार द्वारा ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) की नयी सूची को लेकर जारी की गयी अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें 140 नये समुदायों को ओबीसी सूची में शामिल किया गया था. हाइकोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को विधानसभा के बाहर मिठाइयां बांटीं, जिसकी तृणमूल ने आलोचना की.

कोलकाता

. कलकत्ता हाइकोर्ट की खंडपीठ ने हाल ही में राज्य सरकार द्वारा ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) की नयी सूची को लेकर जारी की गयी अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें 140 नये समुदायों को ओबीसी सूची में शामिल किया गया था. हाइकोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को विधानसभा के बाहर मिठाइयां बांटीं, जिसकी तृणमूल ने आलोचना की. इस दिन तृणमूल भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान पार्टी के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने उक्त मुद्दे का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ‘ओबीसी विरोधी’ पार्टी है. राज्य में विपक्षी दलों के नेताओं की साजिश को समझा जाना चाहिए. उन्होंने कहा : हमें (तृणमूल को) न्याय व्यवस्था और अदालत पर पूरा भरोसा है, लेकिन यह भी गौर करना जरूरी है कि अलग-अलग मामलों को लेकर अदालत में याचिका दायर करने वाले और उसकी पैरवी करने वाले अधिवक्ता कौन हैं? ऐसे लोग, जो नियुक्तियों में अनियमितता को लेकर अदालत में बड़ी-बड़ी बातें करते थे, वे बाद में भाजपा के सांसद बन गये. अब ऐसे लोगों का वर्ग ओबीसी के दायरे में आने वाले लोगों का नुकसान पहुंचाना चाहता है.

इधर, संवाददाता सम्मेलन के दौरान तृणमूल के प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी लोगों पर हमलों के मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा : बांग्लादेश में इस समय हालात अस्थिर है और वहां से कई भारत विरोधी टिप्पणियां सामने आयी हैं. जो लोग बांग्लादेश की अलोकतांत्रिक रवैया की तारीफ कर रहे हैं, उन्हें जरूर बांग्लादेश भेज देना चाहिए, न कि बंगाल के निवासी व बांग्ला भाषियों को. कथित तौर पर बांग्ला भाषियों को लेकर भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने एक विवादास्पद टिप्पणी की है, जो पूरी तरह से देश विरोधी है. अगर वह माफी नहीं मांगते हैं, तो बंगाल की जनता उन्हें मतदान के दौरान सबक सिखायेगी. इतना ही नहीं, शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ यूएपीए धारा के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए और केंद्रीय एजेंसियों को इस मामले की जांच शुरू करनी चाहिए.

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Published by: Bijay kumar

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