कॉलेजों-विश्वविद्यालयों की प्रबंधन समितियों का बढ़ेगा कार्यकाल

साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में हाल ही में हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने शिक्षा जगत को झकझोर कर रख दिया है. इस घटना में कॉलेज प्रबंधन समिति पर सवाल उठने लगे हैं.

संवाददाता, कोलकाता

साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में हाल ही में हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने शिक्षा जगत को झकझोर कर रख दिया है. इस घटना में कॉलेज प्रबंधन समिति पर सवाल उठने लगे हैं. ऐसे में पश्चिम बंगाल के उच्च शिक्षा विभाग ने राज्यभर के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की प्रबंधन समितियों का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ाने का आदेश दिया है. पिछले कुछ वर्षों से कॉलेज प्रबंधन समितियों की कार्यप्रणाली को लेकर शिक्षा जगत में कई तरह के सवाल उठते रहे हैं. कई मामलों में आरोप लगाये गये हैं कि सरकार उच्च शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सभी कॉलेजों की प्रबंधन समितियों में सत्तारूढ़ दल के विधायकों या नेताओं की मौजूदगी बनाये रखकर अपना दबदबा कायम करना चाहती है. उदाहरण के तौर पर कसबा स्थित लॉ कॉलेज की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष अशोक देब हैं, जो बजबज से तृणमूल विधायक हैं. यह बात सामने आयी है कि कसबा लॉ कॉलेज कांड का मुख्य आरोपी ””मांगो”” अशोक देब को ””जेठू”” कहकर बुलाता था. कसबा कांड में प्रबंधन समिति की गतिविधियों को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं, इसलिए इस घटना के संदर्भ में प्रबंधन समिति के कार्यकाल विस्तार की घोषणा को लेकर विभिन्न हलकों में चर्चा शुरू हो गयी है.

शिक्षा विधेयक 2017 के अनुसार, कॉलेज प्रबंधन समिति के लिए चुनाव नहीं होते हैं. इसमें सरकार की ओर से चार सदस्य होते हैं: एक अध्यक्ष, दो मनोनीत सदस्य और एक उच्च शिक्षा विभाग का प्रतिनिधि. इनकी नियुक्ति सीधे सरकार करती है. इसके अलावा, तीन कॉलेज शिक्षक और एक निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि होते हैं. हालांकि, वर्ष 2019 के बाद से किसी भी कॉलेज या विश्वविद्यालय में प्रबंधन समिति में कोई छात्र प्रतिनिधि नहीं रहा है.

ऑल बंगाल प्रिंसिपल काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष पूर्ण चंद्र माइती का दावा है कि राज्य विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कॉलेज प्रबंधन समितियों का कार्यकाल बढ़ाया गया है. उनके अनुसार : प्रबंधन समितियों का भ्रष्टाचार बार-बार उजागर हुआ है, लेकिन अगले साल विधानसभा चुनाव हैं. इसे ध्यान में रखते हुए यह अवधि बढ़ायी गयी है. कोई कितना भी भ्रष्ट क्यों न हो, सरकार चुनाव से पहले किसी को परेशान नहीं करना चाहती है. हालांकि, उच्च शिक्षा विभाग ने जानकारी दी है कि छात्रों के हित में और कॉलेज प्रशासन के सुचारु संचालन के लिए यह अवधि बढ़ायी गयी है.

यह उल्लेखनीय है कि 25 जून को कसबा स्थित साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज के परिसर के अंदर गार्ड के कमरे में एक छात्रा के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया था. इस घटना में कॉलेज के दो छात्रों और एक पूर्व छात्र को गिरफ्तार किया गया है. पूर्व छात्र भी कॉलेज में अस्थायी कर्मचारी के तौर पर कार्यरत था. सभी आरोपी तृणमूल छात्र परिषद से जुड़े हैं. आरोप है कि छात्रा को शादी का प्रस्ताव दिया गया था, और उसके द्वारा मना करने पर ही उसके साथ दुष्कर्म किया गया. बयान में विसंगतियों के कारण पुलिस ने कॉलेज के सुरक्षा गार्ड को भी गिरफ्तार किया है.कसबा सामूहिक दुष्कर्म मामले में कॉलेज प्रबंधन समिति ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. आरोपी दो छात्रों को निष्कासित कर दिया गया है और प्रबंधन समिति ने निर्णय लिया है कि उन्हें किसी अन्य कॉलेज में प्रवेश न मिलने दिया जाए. मुख्य आरोपी ””एम”” को कॉलेज के अस्थायी शिक्षण स्टाफ की नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है.

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By Akhilesh kumar singh

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