तारापीठ से मुकेश तिवारी की रिपोर्ट
घटना को लेकर सोमवार देर रात दमकल मंत्री कौशिक चौधरी जिला प्रशासन और दमकल विभाग के अधिकारियों को लेकर अहम बैठक कर एक कमेटी तैयार कर तारापीठ के समस्त होटल की सुरक्षा व्यवस्था का चाक चौबंद जांच करने का निर्देश दिया है. मंत्री ने कहा कि वो तमाम सेफ्टी होटलों की ऑडिट करायेंगे. मंगलवार सुबह से ही इस दिशा में गठित कमेटी के अधिकारी जांच पड़ताल में जुट गये है. अग्निकांड के बाद अब सबसे बड़ा सवाल तारापीठ के होटल और लॉजों में अग्निसुरक्षा मानकों के पालन को लेकर उठ रहा है.
संदेह में होटलों की अग्निसुरक्षा व्यवस्था
अग्निकांड के बाद तारापीठ के होटलों की अग्निसुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है. हादसे के समय होटल में मौजूद पटना की अर्चना सिंह समेत अन्य आवासीयों ने आरोप लगाया कि आग लगने और धुआं फैलने के बावजूद काफी देर तक कोई फायर अलार्म नहीं बजा. उनके मुताबिक आग बुझाने के लिए पर्याप्त अग्निशमन उपकरण और पानी की व्यवस्था भी नहीं थी. बाद में जो अलार्म बजा, वह स्वचालित नहीं था, बल्कि किसी व्यक्ति ने अलग से बजाया था.
फायर एग्जिट को लेकर गंभीर आरोप
होटल के आपातकालीन फायर एग्जिट को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं. कुछ आवासीयों का दावा है कि निर्धारित आपातकालीन निकास बंद था और आग लगने के बाद भी होटल कर्मचारियों ने उसे खोलने की पहल नहीं की. उनका कहना है कि यदि समय रहते आपातकालीन रास्ता खोल दिया जाता और होटल में स्वचालित फायर अलार्म, पर्याप्त अग्निशमन उपकरण तथा पानी की व्यवस्था होती, तो जानमाल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था.
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एक दूसरे से काफी सटे हुए हैं होटल
हादसे के बाद मीडिया से बात करते हुए पर्यटकों का कहना है कि जिस होटल में आग लगी, उसके सामने कुछ खुली जगह थी, फिर भी इतना बड़ा हादसा हो गया. वहीं तारापीठ के कई अन्य होटल एक-दूसरे से काफी सटे हुए हैं. ऐसे में किसी दूसरे होटल में आग लगने पर आग तेजी से आसपास की इमारतों तक फैलने की आशंका है. इसी आशंका के चलते कई पर्यटक अपनी बुकिंग रद्द कर जल्द से जल्द घर लौटना चाहते हैं.
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