खास बातें
Taniya Bhardwaj on West Bengal Election Result: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के ऐतिहासिक नतीजों ने न केवल सत्ता बदली है, बल्कि 12 साल पुराने उन जख्मों को भी हरा कर दिया है, जो कभी ममता बनर्जी के एक विवादित बयान से उपजे थे.
तानिया ने कहा- ये अहंकार की हार है
वर्ष 2012 में एक टीवी शो के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सरेआम छात्रा तानिया भारद्वाज को माओवादी (Maoist) करार दिया था. वही तानिया आज फिर चर्चा में हैं. बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की करारी शिकस्त के बाद तानिया ने इसे ‘अहंकार की हार’ बताया है. उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने अंततः उस विचारधारा और व्यवहार को नकार दिया है, जो असहमति की आवाज़ को दबाने के लिए नामकरण (Labelling) का सहारा लेती थी.
क्या था 2012 का वो चर्चित विवाद?
मामला मई 2012 का है, जब ममता बनर्जी को सत्ता में आये महज एक साल हुआ था. कोलकाता के प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय की तत्कालीन छात्रा तानिया भारद्वाज ने एक लाइव टॉक शो के दौरान मुख्यमंत्री से राज्य में बढ़ते अपराध और सुरक्षा को लेकर सवाल पूछा था. सवाल सुनते ही ममता बनर्जी मंच पर भड़क गयीं और उन्होंने तानिया को ‘माओवादी’ कह दिया. इतना ही नहीं, ममता बीच में ही शो छोड़कर चली गयीं थीं. इस घटना ने तब अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बटोरी थीं. इसे लोकतांत्रिक आवाज को दबाने के प्रतीक के रूप में देखा गया था.
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12 साल बाद न्याय जैसा अहसास : तानिया की जुबानी
चुनाव परिणामों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए तानिया भारद्वाज ने कहा कि यह जनादेश किसी एक पार्टी की जीत से ज्यादा एक तानाशाही सोच की हार है. तानिया के अनुसार, वर्ष 2012 में जो बीज बोया गया था, वह सत्ता का पूर्ण अहंकार था. जब आप एक साधारण नागरिक या छात्र के सवाल का जवाब देने की बजाय उसे देशद्रोही या माओवादी कहते हैं, तो आप जनता का सम्मान खो देते हैं.
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आरजी कर कांड का किया उल्लेख
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना ने बंगाल के सोये हुए विवेक को जगा दिया, जिसका नतीजा आज सबके सामने है. तानिया ने कहा कि बंगाल के युवाओं ने दिखा दिया है कि उन्हें डराया जा सकता है, लेकिन हमेशा के लिए चुप नहीं कराया जा सकता.
Taniya Bhardwaj on West Bengal Election Result: बंगाल का बदला हुआ मिजाज
तानिया भारद्वाज का बयान ऐसे समय में आया है, जब शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी ने बंगाल में 208 सीटें जीतकर ममता बनर्जी के 15 साल के शासन का अंत किया है. तानिया जैसे चेहरे, जिन्हें कभी ममता शासन के दौरान ‘उत्पीड़ित’ माना गया था, अब सोशल मीडिया पर ‘बंगाल के असली हीरो’ के रूप में पेश किये जा रहे हैं.
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स्वतंत्र नागरिक के रूप में राहत महसूस कर रहीं भारद्वाज
तानिया का कहना है कि वे अब भी किसी राजनीतिक दल की पक्षधर नहीं हैं, लेकिन एक स्वतंत्र नागरिक के रूप में वे आज राहत महसूस कर रही हैं कि अब कोई मुख्यमंत्री किसी छात्र को उसकी राय के लिए ‘आतंकवादी’ नहीं कहेगा.
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