खास बातें
Suvendu Adhikari Bhabanipur Seat: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को अपनी भविष्य की राजनीतिक राह साफ कर दी. विधानसभा में विधायक पद की शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वे कोलकाता की हाई-प्रोफाइल भवानीपुर सीट को अपने पास रखेंगे. नंदीग्राम विधानसभा सीट से इस्तीफा दे देंगे. हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में शुभेंदु अधिकारी ने इन दोनों ही सीटों पर शानदार जीत दर्ज की थी. मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद अब नंदीग्राम में उपचुनाव का रास्ता साफ हो गया है.
भवानीपुर से ली शपथ, नंदीग्राम को दिया भरोसा
विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने भावुक और रणनीतिक संदेश दिया. कहा- नंदीग्राम सीट से (उपचुनाव में) कोई और विधायक चुना जायेगा, लेकिन मैं वहां के लोगों को कभी यह महसूस नहीं होने दूंगा कि शुभेंदु अधिकारी वहां का विधायक नहीं है. वहां के विकास के लिए किये गये हर वादे को मैं खुद पूरा करूंगा.
मीडिया को बताया अपना पुराना अनुभव
पूर्व मेदिनीपुर के बेटे शुभेंदु ने वर्ष 2008 के नंदीग्राम आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि जब फिरोजा बीबी वहां से विधायक थीं, तब भी उन्होंने पर्दे के पीछे रहकर वहां की सेवा की थी. इस बार भी वे वैसी ही भूमिका निभायेंगे. शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर में उन्हें 15,105 वोटों के अंतर से करारी शिकस्त दी थी. नंदीग्राम में उन्होंने टीएमसी के पवित्र कर को 9,665 वोटों से हराया था.
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PM मोदी की सलाह पर घटाया अपना काफिला
राजनीतिक फैसलों के साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक खर्चों में कटौती की ओर भी कदम बढ़ाये हैं. पश्चिम एशिया संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल बचत की अपील पर शुभेंदु अधिकारी ने तुरंत अमल किया है. उन्होंने डीजीपी और निदेशक (सुरक्षा) को निर्देश दिया है कि उनके काफिले से सभी गैर-जरूरी वाहनों को तुरंत हटाया जाये. सीएम ने कहा- प्रधानमंत्री हमारे मार्गदर्शक हैं. उनके द्वारा ईंधन की बचत और सादगी की सलाह राष्ट्रहित में है. हम उनके दिखाये रास्ते पर ही चलेंगे.
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Suvendu Adhikari Bhabanipur Seat: नंदीग्राम में अब कौन होगा चेहरा?
शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद अब सबकी नजरें नंदीग्राम के उपचुनाव पर टिकी हैं. भाजपा वहां से किसी स्थानीय चेहरे को मौका दे सकती है, ताकि मुख्यमंत्री का प्रभाव भी बना रहे और संगठन को भी मजबूती मिले. भवानीपुर सीट को अपने पास रखकर शुभेंदु ने यह संदेश दिया है कि वे कोलकाता के दिल से अपनी सरकार का नियंत्रण और भी मजबूत करना चाहते हैं.
