Suvendu Adhikari Dandavat Pranam: पश्चिम बंगाल विधानसभा के इतिहास में बुधवार का दिन एक ऐसी तस्वीर का गवाह बना, जिसने 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संसद की सीढ़ियों को नमन करने की यादें ताजा कर दीं. राज्य के नये मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा के भीतर प्रवेश करने से पहले उसकी दहलीज पर नंगे पैर झुककर ‘दंडवत प्रणाम’ किया.
सीएम के पास मौजूद विधायक हुए भावुक
लोकतंत्र के मंदिर के प्रति इस अगाध श्रद्धा को देख वहां मौजूद विधायक और समर्थक भावुक हो गये. शुभेंदु के इस कदम को सीधे तौर पर पीएम मोदी के पदचिह्नों पर चलने और राज्य में ‘सेवा भाव’ की राजनीति शुरू करने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
लोकतंत्र के मंदिर को नमन, याद आया वर्ष 2014
बुधवार सुबह जब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी शपथ ग्रहण समारोह के लिए विधानसभा पहुंचे, तो उन्होंने मुख्य द्वार पर रुक गये. जूते उतारे और पूरी श्रद्धा के साथ फर्श पर लेटकर विधानसभा की दहलीज को प्रणाम किया. समर्थकों ने तुरंत इसकी तुलना वर्ष 2014 से की, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार संसद पहुंचे थे और उन्होंने संसद भवन की सीढ़ियों पर माथा टेका था.
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शपथ ग्रहण के बाद एक्शन मोड में मुख्यमंत्री
विधानसभा की दहलीज को नमन करने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने विधायक के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली. इस दौरान उनके चेहरे पर जीत की चमक और जिम्मेदारी का भाव साफ नजर आ रहा था. मुख्यमंत्री ने विधानसभा परिसर में स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ‘अहंकार’ से नहीं, ‘समर्पण’ से चलेगी.
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Suvendu Adhikari Dandavat Pranam: सीएम की पहल से विरोधियों को गया संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस भावुक कदम से शुभेंदु अधिकारी ने जनता के बीच अपनी छवि एक ‘प्रधान सेवक’ की बनाने की कोशिश की है, जो पिछली सत्ता के ‘तानाशाही’ रवैये के उलट है. विधानसभा की चौखट पर झुके मुख्यमंत्री की यह तस्वीर आने वाले कई दशकों तक बंगाल की राजनीति में मील का पत्थर मानी जायेगी. यह महज प्रणाम नहीं, एक नयी कार्यसंस्कृति की शुरुआत का प्रतीक है.
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सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीर
शुभेंदु अधिकारी के दंडवत प्रणाम की तस्वीर सोशल मीडिया पर देखते ही देखते वायरल हो गयी. भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसे ‘बंगाल में लोकतंत्र की पुनर्स्थापना’ करार दिया. मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से संक्षिप्त बातचीत में कहा कि यह सदन राज्य के 7 करोड़ लोगों की आवाज है. वे यहां केवल उनके सेवक के रूप में आये हैं.
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