राज्य सरकार के ग्रुप बी की तालिका में दी गयी गलत जानकारी : नेता प्रतिपक्ष

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकार पर सुप्रीम कोर्ट में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया है.

कोलकाता.

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकार पर सुप्रीम कोर्ट में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया है. मंगलवार को तमलुक स्थित अपने कार्यालय से संवाददाताओं को संबोधित करते हुए शुभेंदु ने नदिया जिले का उदाहरण देते हुए कहा कि नदिया ज़िले में जिन अधिकारियों को ग्रुप-बी के रूप में नामित किया गया है, उनमें से अधिकारी कर्मचारी ग्रुप-सी के हैं. कई को पंचायतों से नियुक्त किया गया है और यहां तक कि निर्माण सहायक के पद पर तैनात कर्मचारियों के नाम भी सूची में भी शामिल हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि 8500 अधिकारियों की सूची में व्यापक स्तर पर गलत जानकारी और निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया गया है. इसके अलावा, क्रम संख्या 434 पर मृत अथवा सेवानिवृत्त अधिकारी स्वपन कुमार विश्वास का नाम भी सूची में भेजा गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय को गुमराह किया गया है. चूंकि मुख्यमंत्री ने स्वयं शिकायत दर्ज करायी है, इसलिए दी गयी गलत जानकारी के आधार पर अवमानना कार्यवाही संभव है.

शुभेंदु ने एईआरओ व एआरओ अधिकारियों को किया सतर्क : श्री अधिकारी ने कहा कि निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार केवल केंद्र सरकार से जुड़े लगभग 8300 माइक्रो ऑब्जर्वर्स और ग्रुप-बी अधिकारी ही इस प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं. केवल स्वीकृत नामों के संबंध में ही माइक्रो ऑब्जर्वर्स ईआरओ और एईआरओ की सहायता कर सकते हैं. श्री अधिकारी ने चेतावनी दी कि ये ईआरओ और एईआरओ अधिकारी अगर आइ-पैक या किसी भी वरिष्ठ अधिकारी या किसी राजनीतिक पार्टी के निर्देश पर कार्य करते हैं, तो यह अन्याय होगा और यह न्यायालय की अवमानना के अंतर्गत आयेगा. उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 19 जनवरी 2026 के आदेश में दिये गये दिशा-निर्देश केवल सुनवाई के उद्देश्य से थे और नामों की स्वीकृति या अस्वीकृति के विषय में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्वाचन आयोग के पक्ष को स्वीकार किया है.

श्री अधिकारी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस भ्रामक जानकारियां फैला रही है कि माइक्रो ऑब्जर्वर्स केवल निगरानी करेंगे और कोई निर्णय नहीं लेंगे, जबकि नामित राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी निर्णय लेने का अधिकार नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ईआरओ ने अपनी शक्तियां एईआरओ को प्रत्यायोजित की हैं और यह पूरी तरह स्पष्ट है कि सभी विवरण सही पाये जाने पर नाम स्वीकार होगा, अन्यथा अस्वीकार कर दिया जायेगा.

युवाओं को गुमराह करने के प्रयास किये जा रहे हैं : युवासाथी योजना पर शुभेंदु ने कहा कि चार महीने का यह बजट रोजगार सृजन या रिक्त पदों को भरने के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत नहीं करता, जबकि राज्य में बड़ी संख्या में पद खाली हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि रोजगार की वास्तविक समस्या को हल करने के बजाय सरकार भत्तों और अनुदानों की घोषणाओं के माध्यम से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है, जो दीर्घकालिक समाधान नहीं हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पहले घोषित कई बेरोजगारी भत्ते और युवा कल्याण योजनाएं नियमित रूप से लागू नहीं की गयीं और अब चुनाव से पहले इसी प्रकार की नयी घोषणाएं युवाओं को गुमराह करने के प्रयास हैं.

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By BIJAY KUMAR

BIJAY KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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