खास बातें
Sunil Bansal Architect of BJP Victory: भारतीय राजनीति में अक्सर वही नेता चमकता है, जो टीवी स्क्रीन पर ज्यादा दिखता है. लेकिन भाजपा में एक ऐसा नाम है, जो हेडलाइंस से दूर रहता है, पर उसके नतीजे इतिहास लिख देते हैं. हम बात कर रहे हैं सुनील बंसल की, जिन्हें भाजपा का ‘साइलेंट आर्किटेक्ट’ माना जाता है.
बंसल की डेटा वाली राजनीति ने सबको कर दिया हैरान
इस शख्स को पार्टी हर उस राज्य में भेजती है, जहां जीत नामुमकिन लगती है. उत्तर प्रदेश में 71 सीटें जिताने से लेकर ओडिशा में नवीन पटनायक का साम्राज्य खत्म करने और अब बंगाल में ‘कमल’ खिलाने तक, बंसल की डेटा वाली राजनीति ने सबको हैरान कर दिया है.
सुनील बंसल की रणनीति की 5 बड़ी बातें
- बूथ लेवल का ब्लिट्ज : बंसल का मानना है कि चुनाव टीवी पर नहीं, बूथ पर जीता जाता है. उन्होंने हर 50-60 मतदाताओं पर एक कार्यकर्ता की जिम्मेदारी तय की.
- डेटा और अनुशासन : उनका काम करने का तरीका पूरी तरह डेटा पर आधारित है. टिकट वितरण में उन्होंने सख्त अनुशासन रखा और केवल ‘क्लीन इमेज’ वालों को ही मौका दिया.
- पुराने कार्यकर्ताओं की घर वापसी : बंगाल में उन्होंने उन पुराने भाजपाइयों को दोबारा सक्रिय किया जो घर बैठ गये थे.
- थकना मना है : बंगाल चुनाव के दौरान बंसल और भूपेंद्र यादव सुबह 7 बजे से रात 3 बजे तक काम करते थे और रोजाना करीब 25 बड़ी बैठकें करते थे.
- ओडिशा का चमत्कार : वर्ष 2014 में भाजपा के पास ओडिशा में केवल 1 सीट थी, बंसल की रणनीति से 2024 में वह 20 सीटों पर पहुंच गयी और पूर्ण बहुमत की सरकार बनायी.
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यूपी से शुरू हुआ सफर, अब बंगाल में दीदी का ‘खेला’ खत्म
सुनील बंसल की सफलता की कहानी उत्तर प्रदेश से शुरू हुई थी. वर्ष 2012 में भाजपा महज 47 सीटों पर थी, वहां अमित शाह के साथ मिलकर बंसल ने वर्ष 2017 में 312 सीटों का ऐतिहासिक आंकड़ा छुआ. यही मॉडल उन्होंने ओडिशा, तेलंगाना और अब पश्चिम बंगाल में दोहराया है.
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बंगाल का ‘बंसल मॉडल : 80 हजार बूथों की घेराबंदी
पश्चिम बंगाल में जीत कोई तुक्का नहीं थी. बंसल पिछले 4 साल से बंगाल की जमीन तैयार कर रहे थे. उन्होंने बंगाल के 80,000 पोलिंग बूथों में से 65,000 से अधिक पर सक्रिय बूथ कमेटियां बनायीं. वर्ष 2021 की गलतियों से सीखते हुए, उन्होंने बाहरी लोगों को सीधे टिकट देने की बजाय जमीन पर काम करने वाले राष्ट्रवादियों को प्राथमिकता दी. भूपेंद्र यादव के साथ मिलकर उन्होंने पार्टी के भीतर के कलह को खत्म किया और कैडर को एक दिशा में मोड़ा.
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Sunil Bansal Architect of BJP Victory: तेलंगाना और ओडिशा में भी बढ़ाया पार्टी का कद
तेलंगाना में भाजपा का आधार न के बराबर था. वहां वर्ष 2014 की 1 सीट के मुकाबले वर्ष 2024 में 8 सीटें जीतकर पार्टी को कांग्रेस के बराबर ला खड़ा किया. ओडिशा में नवीन पटनायक की बीजेडी को शून्य पर समेटना बंसल की रणनीतिक क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण माना जा रहा है.
मोदी-शाह के विजन को जमीन पर उतारने वाले ‘ट्रबलशूटर’
सुनील बंसल आज भाजपा के वह ‘ट्रबलशूटर’ बन चुके हैं, जो मोदी-शाह के विजन को जमीन पर हकीकत में बदलते हैं. उनकी राजनीति शोर-शराबे की नहीं, बल्कि ठोस संरचना और अटूट मेहनत की है.
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