सुंदरबन में मौत से महायुद्ध : बाघ ने जबड़े में दबोच लिया मछुआरे का सिर, 5 साथियों ने ऐसे बचायी जान

Sundarban Tiger Attack: पश्चिम बंगाल के सुंदरबन में केकड़ा पकड़ते समय मछुआरे निखिल मंडल पर बाघ ने हमला कर दिया. उसके साथियों ने बहादुरी दिखाते हुए लाठियों से बाघ को पीटना शुरू किया और वहां से खदेड़ा. निखिल गंभीर हालत में बशीरहाट अस्पताल में भर्ती.

Sundarban Tiger Attack: सुंदरबन के घने जंगलों में रोजी-रोटी की तलाश मौत के करीब ले गयी, लेकिन दोस्तों ने बहादुरी का परिचय दिया और उसे मौत के मुंह से निकाल लाये. शनिवार शाम को दक्षिण 24 परगना के शमशेरनगर के एक मछुआरे निखिल मंडल पर आदमखोर बाघ ने उस वक्त जानलेवा हमला कर दिया, जब वह अपने साथियों के साथ केंकड़ा पकड़ रहा था.

10 मिनट तक जारी रहा बाघ से संघर्ष

बाघ निखिल को खींचकर गहरे जंगल में ले जाने ही वाला था कि उसके 5 साथियों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए बाघ पर लाठियों और बांस से धावा बोल दिया. करीब 10 मिनट तक चले इस रोंगटे खड़े कर देने वाले संघर्ष के बाद बाघ को पीछे हटना पड़ा. फिलहाल, निखिल बशीरहाट जिला अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है.

नाव पर छलांग और सीधा गर्दन पर वार

घटना सुंदरबन के बड़ीतला जंगल क्षेत्र की है. निखिल मंडल अपने 5 साथियों के साथ नाव पर सवार होकर केंकड़ा पकड़ने निकला था. प्रत्यक्षदर्शी गोविंद मंडल ने बताया कि वे सभी काम में व्यस्त थे. तभी अचानक झाड़ियों से निकलकर एक विशालकाय बाघ ने सीधे नाव पर छलांग लगा दी. बाघ ने बिजली की फुर्ती से निखिल की गर्दन को अपने जबड़ों में जकड़ लिया और उसे पानी में खींचने लगा.

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बाघ की गर्दन पर वार कर बचायी दोस्त की जान

अचानक हुए हमले से एक पल के लिए सभी सन्न रह गये, लेकिन गोविंद और अन्य साथियों ने तुरंत मोर्चा संभाला. गोविंद ने बताया- बाघ निखिल को जंगल की ओर खींच रहा था. मैंने पूरी ताकत से बांस उठाकर बाघ की गर्दन और सिर पर वार करना शुरू किया. हमारे शोर और लगातार हमलों से बाघ सकपका गया और निखिल को छोड़कर वापस जंगल में भाग गया.

बशीरहाट जिला अस्पताल में भर्ती निखिल की हालत नाजुक

बाघ के हमले में निखिल के सिर और गर्दन पर गहरे जख्म आये हैं. खून से लथपथ हालत में साथी उसे तुरंत योगेशगंज अस्पताल ले गये, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे बशीरहाट जिला अस्पताल रेफर कर दिया. अस्पताल में निखिल की हालत काफी चिंताजनक बनी हुई है. उसे कड़ी निगरानी में रखा गया है.

सुंदरबन की कड़वी हकीकत

सुंदरबन में यह कोई पहली घटना नहीं है. यहां के मछुआरे अपनी जान जोखिम में डालकर मछली और केंकड़ा पकड़ने जंगल के प्रतिबंधित कोर एरिया के पास जाने को मजबूर हैं. वन विभाग बार-बार चेतावनी देता है, लेकिन जीविका का कोई दूसरा साधन न होने के कारण ग्रामीण हर दिन ‘यमराज’ के इलाके में कदम रखते हैं.

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By Mithilesh Jha

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