सुंदरबन दुनिया का सुंदर क्षेत्र, बंगाल सरकार ने नहीं किया इसका विकास, बोले भूपेंद्र यादव

Sundarban News: सुंदरबन के गोसाबा में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की 28वीं बैठक और प्रोजेक्ट एलीफेंट की 22वीं संचालन समिति की अहम बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में भूपेंद्र यादव ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार वन्य क्षेत्रों के संरक्षण और विकास के लिए धन उपलब्ध करा रही है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इन फंडों का समुचित उपयोग नहीं किया जा रहा.

Sundarban News| सुंदरबन से अमित शर्मा की रिपोर्ट : केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के मंत्री भूपेंद्र यादव ने रविवार को पश्चिम बंगाल सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सुंदरबन दुनिया के सबसे सुंदर और जैव विविधता से भरपूर क्षेत्रों में से एक होने के बावजूद राज्य सरकार इसके विकास, पर्यटन विस्तार और स्थानीय लोगों को रोजगार देने में पूरी तरह विफल रही है. सुंदरबन दौरे पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य सरकार ने इस अनमोल क्षेत्र की संभावनाओं को नजरअंदाज किया है.

सुंदरबन के गोसामा में एनटीसीए की बैठक में शामिल हुए भूपेंद्र यादव

सुंदरबन के गोसाबा में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की 28वीं बैठक और प्रोजेक्ट एलीफेंट की 22वीं संचालन समिति की अहम बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में भूपेंद्र यादव ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार वन्य क्षेत्रों के संरक्षण और विकास के लिए धन उपलब्ध करा रही है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इन फंडों का समुचित उपयोग नहीं किया जा रहा.

5 साल में बाघ परियोजना के तहत केंद्र ने बंगाल को दिये 112 करोड़ रुपए

उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में सुंदरबन के लिए बाघ परियोजना के तहत 112 करोड़ रुपये और हाथी संरक्षण के लिए 344 करोड़ रुपये आवंटित किये गये, लेकिन इनका बड़ा हिस्सा जमीन पर दिखायी नहीं देता.

Sundarban News: 2500 वर्ग किलोमीटर में फैला है सुंदरबन

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि करीब 2,500 वर्ग किलोमीटर में फैला सुंदरबन न केवल बाघों, मगरमच्छों, हिरणों और 250 से अधिक पक्षी प्रजातियों का घर है, बल्कि यहां इको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं. यदि पर्यटन को वैज्ञानिक और पर्यावरण-संतुलित तरीके से विकसित किया जाये, तो स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिल सकता है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गयी.

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विकास नहीं हो रहा, सुंदरबन में बढ़ रहे अवैध कब्जे – भूपेंद्र

यादव ने यह भी आरोप लगाया कि सुंदरबन क्षेत्र में विकास कार्यों की जगह अवैध कब्जे बढ़ते जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर कुछ सामाजिक और राजनीतिक तत्व वन भूमि पर लगातार अवैध कब्जा कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है और वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंच रहा है. केंद्र सरकार ने कई बार इस मुद्दे पर राज्य को सतर्क किया है, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई.

सुंदरबन से ज्यादा विकास हुआ रणथंभौर टाइगर रिजर्व का

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि सुंदरबन जैसे क्षेत्र का प्रचार-प्रसार राज्य सरकार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करना चाहिए था, लेकिन इसकी तुलना में राजस्थान का रणथंभौर टाइगर रिजर्व बेहतर तरीके से विकसित किया गया है. रणथंभौर में हर साल 18 से 19 लाख पर्यटक आते हैं, जबकि सुंदरबन में यह संख्या करीब 9.5 लाख तक ही सीमित है. उन्होंने इसे राज्य सरकार की नीति और इच्छाशक्ति की कमी करार दिया.

सुंदरबन को मॉडल क्षेत्र बनाना चाहती है केंद्र सरकार – यादव

भूपेंद्र यादव ने साफ किया कि चाहे राज्य सरकार कदम उठाये या नहीं, केंद्र सरकार सुंदरबन के संरक्षण और विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सुंदरबन को एक मॉडल क्षेत्र के रूप में विकसित करना चाहती है, जहां संरक्षण, पर्यटन और स्थानीय समुदायों के हितों के बीच संतुलन हो.

हाथियों की मौत के मामले में केंद्र ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट

इसी दौरान असम के होजाई जिले में ट्रेन से कुचल कर आठ हाथियों की मौत के मामले पर भी केंद्रीय मंत्री ने कड़ा रुख दिखाया है. उन्होंने बताया कि इस घटना पर केंद्र ने संबंधित विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और सभी राज्यों को रेलवे पटरियों के आसपास हाथियों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखने को कहा गया है. श्री यादव ने कहा- असम में तथा देश के उन सभी क्षेत्रों में, जहां हाथियों का प्राकृतिक आवास और रेलवे लाइनें मौजूद हैं, संबंधित इलाके में मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम), मंडलीय वन अधिकारी (डीएफओ) और स्थानीय लोगों को हितधारक बनाकर एक टीम का गठन किया गया है.

हाथियों से जुड़े हादसों के 1100 हॉट स्पॉट की पहचान

देश में हाथियों से जुड़े हादसों के 1,100 संभावित दुर्घटना क्षेत्र या ‘हॉट स्पॉट’ की पहचान की गयी है, जहां इस तरह के हादसों को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाये जा रहे हैं. रेलवे और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय से ही ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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