ग्रामीण वोटरों को लुभाने की कोशिश कोलकाता. पश्चिम बंगाल सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के ग्रामीण इलाकों में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को त्वरित ऋण उपलब्ध कराने के लिए विशेष पहल शुरू की है. हालांकि, प्रशासनिक तौर पर कहा जा रहा है कि राज्य सरकार का यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार और विभिन्न बैंकों ने संयुक्त रूप से स्वयं सहायता समूहों को त्वरित ऋण सुनिश्चित करने के लिए एक नयी पहल शुरू की है. इससे ग्रामीण बंगाल की वित्तीय संरचना मजबूत होगी और स्वयं सहायता महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों का विस्तार होगा. हाल ही में, राज्य सरकार और राज्य स्तरीय बैंकर्स उप-समिति द्वारा संयुक्त रूप से स्वयं सहायता समूहों पर एक समीक्षा बैठक आयोजित की गयी थी. बैठक में विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारी और स्वयं सहायता समूह विभाग के अधिकारी उपस्थित थे. चर्चा से यह बात सामने आई कि यद्यपि पिछले एक वर्ष में राज्य के विभिन्न जिलों में स्वयं सहायता समूहों के लिए ऋण लिंकेज कार्यक्रम में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, फिर भी कुछ जिलों में अभी भी तेजी लाने की आवश्यकता है. सूत्रों के अनुसार, बैठक में निर्णय लिया गया कि आने वाले दिनों में सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों को त्वरित और आसान ऋण सुनिश्चित करने के लिए बैंकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा. इसके अलावा, ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए विशेष बुनियादी ढांचे पर भी विचार किया जा रहा है. हालांकि, प्रशासनिक तौर पर कहा गया है कि यह पहल कोई राजनीतिक कदम नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रहे एक नियमित कार्यक्रम का हिस्सा है. राज्य सरकार साल भर बैंकों के साथ मिलकर स्वयं सहायता समूहों को ऋण उपलब्ध कराकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाये रखने की कोशिश करती है. सरकार का दावा है कि इस बार की पहल उस प्रक्रिया को और प्रभावी व तेज़ बनाने की कोशिश है, ताकि विकास की झलक राज्य के सुदूर इलाकों तक भी पहुंचे.
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