कोलकाता.
विधानसभा में मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि मिदनापुर मेडिकल कॉलेज की घटना के बादे जिस रिंगर लैक्टेट (आरएल) सलाइन पर सवाल उठाये गये थे, उसे राज्य औषधि नियंत्रण एवं अनुसंधान प्रयोगशाला ने क्लीनचिट दे दी है, क्योंकि दवा की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं पायी गयी है. सदन को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा: विपक्ष ने सलाइन का मुद्दा उठाया था. उन्हें बता दें कि मिदनापुर मेडिकल कॉलेज में इस्तेमाल किये गये रिंगर लैक्टेट के बैच की जांच वेस्ट बंगाल ड्रग कंट्रोल एंड रिसर्च लैब्रोटरी (राज्य औषधि नियंत्रण एवं अनुसंधान प्रयोगशाला) में की गयी थी. जांच में कोई कमी नहीं पायी गयी. अस्पताल को उचित गुणवत्ता वाली सलाइन भेजी गयी थी. इसके लिए उचित प्रोटोकॉल है और इसलिए यह असंभव है कि किसी अस्पताल को खराब गुणवत्ता वाली दवा दी जाये. उन्होंने बताया कि राज्य के सेंट्रल मेडिकल स्टोर अस्पतालों को भेजने से पहले दवा के प्रत्येक बैच की जांच करता है. उन्होंने यह भी बताया कि राज्य के सरकारी अस्पताल एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं द्वारा जारी प्रमाण पत्र देखने के बाद इन दवाओं को प्राप्त करते हैं. बता दें कि राज्य स्वास्थ्य विभाग ने इस साल जनवरी में एक आदेश जारी कर सभी सरकारी अस्पतालों को रिंगर लैक्टेट इन्फ्यूजन सहित 10 तरल पदार्थों का उपयोग बंद करने को कहा था. यह आदेश मिदनापुर मेडिकल कॉलेज में एक बच्चे को जन्म देने वाली 21 वर्षीय महिला की मौत के मद्देनजर दिया गया था, जिसने कथित तौर पर एक्सपायर्ड सलाइन दिये जाने के बाद अस्पताल में दम तोड़ दिया था. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर मुख्य सचिव मनोज पंत ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव से घटना पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी. कई दवाओं पर प्रतिबंध के संबंध में आदेश सभी राज्य मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों और राज्य भर के सभी वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों को भेजा गया था. इस मामले में मिदनापुर मेडिकल कॉलेज में एक गर्भवती महिला मामोनी रुइदास (22) की मौत हो गयी थी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
