एसएससी सुविधानुसार लागू कर सकता है नये नियम

पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के नये नियुक्ति नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गयी थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है.

राज्य सरकार व एसएससी को उच्चतम न्यायालय से मिली राहत, नयी अधिसूचना पर रोक लगाने से किया इंकार

संवाददाता, कोलकाता

पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के नये नियुक्ति नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गयी थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है. इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं से पूछा, “क्या सुप्रीम कोर्ट दांव या जुआ लगाने की जगह है? ” सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसएससी नियमों को चुनौती देने वाला मामला विचारणीय नहीं है. क्योंकि अदालत के आदेश में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि पुराने नियमों के अनुसार ही नियुक्ति की जाये. अदालत ने कहा कि नियुक्ति नियमों पर निर्णय लेने का अधिकार आयोग के पास है. मामला विचारणीय न होने की बात सुनने के बाद, याचिकाकर्ताओं के वकील विकास रंजन भट्टाचार्य ने याचिका वापस लेो की बात कही, इस पर न्यायाधीश नाखुश हो गये, क्योंकि तब तक मामले की सुनवाई काफी देर हो चुकी थी. न्यायाधीश ने कहा कि अब मामला वापस नहीं लिया जा सकता, इसे खारिज किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि वकीलों का ऐसा व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है.

गौरतलब है कि करीब 26,000 नौकरियों को रद्द करने के बाद, एसएससी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए नयी नियुक्ति अधिसूचना जारी की थी, लेकिन अभ्यर्थियों के एक वर्ग ने नयी अधिसूचना में दिये गये कई नियमों पर आपत्ति जताते हुए हाइकोर्ट में याचिका दायर की. इनमें प्रतीक्षा सूची में शामिल उम्मीदवार भी शामिल थे. कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सौमेन सेन और न्यायमूर्ति स्मिता दास की खंडपीठ ने इससे संबंधित सभी मामलों को खारिज कर दिया. न्यायालय ने कहा कि एसएससी की अधिसूचना में हस्तक्षेप नहीं किया जायेगा. यह सही है कि मौजूदा गतिरोध के लिए आयोग और बोर्ड ज़िम्मेदार हैं. लेकिन हमारा लक्ष्य रिक्तियों को शीघ्र भरना है. अन्यथा, आने वाले दिनों में और भी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं. इस आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में एक मामला दायर किया गया था. सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई की. न्यायमूर्ति कुमार ने याचिकाकर्ताओं से पूछा, “आप कौन हैं? योग्य या अयोग्य? अयोग्य शिक्षकों को हटा दिया गया है. इसके बाद न्यायाधीश ने कहा, “हमने कहीं नहीं कहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया पिछले नियमों के अनुसार ही पूरी करनी है. हमने नयी नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है. हमने किसी नियम का उल्लेख नहीं किया है. एसएससी एक ज़िम्मेदार स्वायत्त संस्था है. ऐसे में, वे नियुक्ति पर निर्णय ले सकते हैं.

नये नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज :

गौरतलब है कि 2024 में सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की पीठ ने 2016 के एसएससी पैनल को रद्द करने का आदेश दिया था. परिणामस्वरूप 25,735 शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों की नौकरियां रद्द कर दी गयीं. उस पीठ में मुख्य न्यायाधीश के साथ न्यायमूर्ति कुमार भी मौजूद थे. सोमवार को इसी से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने कहा, “अदालत ने विचार-विमर्श के बाद फैसला सुनाया था. उस समय मुख्य न्यायाधीश ने फैसला सुनाने से पहले मुझसे चर्चा की थी. मैं भी उस फैसले से सहमत था. उसके बाद फैसला सुनाया गया. क्षमा करें, मैं आपके दावे को स्वीकार नहीं कर सकता. न्यायमूर्ति कुमार ने कहा, “अदालत को नहीं लगता कि यह मामला स्वीकार योग्य है.

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Published by: Akhilesh kumar singh

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